ईरान-अमेरिका के बीच सुलह कराने वाला पाकिस्तान अब बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है। उसकी अर्थव्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) लगातार शिकंजा कसता जा रहा है।
फेडरल बजट 2026-27 बनाने की तैयारी में जुटे पाकिस्तानी सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने साफ चेतावनी दी है कि व्यापार के रास्ते हो रही मनी लॉन्ड्रिंग को तुरंत रोकना होगा। बिना इस पर सख्त कार्रवाई के आगे कोई राहत मिलना मुश्किल है।
व्यापार और रियल एस्टेट में भारी गड़बड़ियां
आईएमएफ की रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता व्यापार आधारित मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर जताई गई है। बैंकिंग, रियल एस्टेट और दूसरे गैर-वित्तीय कारोबारों में संदिग्ध गतिविधियां खूब चल रही हैं। कोष ने कहा कि इन क्षेत्रों में नजर रखने की व्यवस्था कमजोर है।
खासकर रियल एस्टेट में संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्टिंग बहुत कम हो रही है, जो बेहद चिंताजनक है। पाकिस्तान में डीएनएफबीपी (डिजाइनेटेड नॉन-फाइनेंशियल बिजनेस एंड प्रोफेशंस) की व्यवस्था को आईएमएफ ने नाकाफी बताया है।
फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने रियल एस्टेट डील्स पर नजर रखने के लिए यह सिस्टम बनाया था, लेकिन इसका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है। वह अब हाउसिंग सोसाइटियों पर छापेमारी बढ़ा रहा है और छिपी हुई संपत्ति का पता लगाने की कोशिश कर रहा है।
मालिकाना हक की जानकारी में बड़ा होल
आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार से कहा कि लाभकारी मालिकाना हक (बेनिफिशियल ओनरशिप) की जानकारी साझा करने की व्यवस्था में बड़े-बड़े छेद हैं। बैंकों और दूसरे संस्थानों में संदिग्ध ट्रांजेक्शन की रिपोर्टिंग बढ़ानी होगी। गैर-वित्तीय क्षेत्रों से भी ज्यादा रिपोर्ट आनी चाहिए।
बजट से पहले IMF टीम पहुंच रही
कल से IMF की टीम पाकिस्तान पहुंच रही है। वित्त मंत्रालय के साथ उनकी बातचीत करीब एक हफ्ते तक चलेगी। इसमें टैक्स वसूली के लक्ष्य, खर्चों की योजना, विकास कार्यों पर खर्च और बजट को संतुलित रखने के उपायों पर चर्चा होगी।
सूत्रों के मुताबिक आईएमएफ सख्ती बरतने वाला है और पाकिस्तान को स्पष्ट संकेत दे रहा है कि पुरानी आदतें अब नहीं चलेंगी। पाकिस्तान पिछले कई सालों से आईएमएफ के पैसों पर निर्भर रहा है। हर बार नए कर्ज या राहत के लिए शर्तें बढ़ती जा रही हैं।
वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी जैसे मुद्दे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए घाव बन चुके हैं। अगर सरकार अब भी सख्त कदम नहीं उठाती तो आम लोगों पर महंगाई और टैक्स का बोझ और बढ़ सकता है।


