चार साल बाद भी नपं की व्यवस्था बेपटरी सुविधाओं के अभाव से नाराज नगरवासी

चार साल बाद भी नपं की व्यवस्था बेपटरी सुविधाओं के अभाव से नाराज नगरवासी

बौंसी | नगर पंचायत गठन के लगभग चार वर्ष बीत जाने के बाद भी बौंसी नगर पंचायत में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं दिख रही है। नगरवासियों का आरोप है कि विकास कार्य अब तक केवल आश्वासनों तक सीमित है, जबकि जलापूर्ति, स्वच्छता, नाला, सड़क एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति लगातार बदहाल बनी हुई है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और नगर पंचायत प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि नगर पंचायत बनने के समय उन्होंने विकास की उम्मीद में मतदान किया था, लेकिन चार वर्षों बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। कई स्थानों पर नालियों की सफाई नहीं होने, सड़कों के जर्जर होने तथा गलियों में टूटे ढक्कनों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। नगरवासियों के अनुसार, विभिन्न समस्याओं को लेकर कई बार आंदोलन और विरोध प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। बाराहाट क्षेत्र में बारिश शुरू होते ही पंजवारा रेलवे हाल्ट के निचले हिस्से में बने पुल पर जलजमाव की पुरानी समस्या फिर सामने आ गई है। हर साल की तरह इस बार भी तेज बारिश के बाद पुल के नीचे पानी जमा हो गया, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर हर बारिश में लोगों को इसी समस्या से क्यों जूझना पड़ता है, जबकि यह बिहार-झारखंड को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भागलपुर-गोड्डा मुख्य सड़क पर स्थित इस पुल से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है। लेकिन बारिश के दौरान पुल के नीचे पानी भर जाने से खासकर बाइक, ऑटो और छोटे वाहनों को काफी कठिनाई होती है। कई बार छोटे हादसे भी हो चुके हैं, फिर भी समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हो रही है। बांका | बांका नगर परिषद द्वारा शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर विभिन्न वार्डों में लगाए गए स्टील डस्टबीन अब बदहाली का शिकार होते दिख रहे हैं। कई स्थानों पर डस्टबीन पूरी तरह से गायब हो चुके हैं, जबकि कहीं केवल उनका स्टैंड ही बचा हुआ है। इससे नगर परिषद की निगरानी व्यवस्था और सरकारी राशि के उपयोग पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए लगाए गए डस्टबिन कुछ ही दिनों में या तो क्षतिग्रस्त हो गए या फिर चोरी हो गए, लेकिन नगर परिषद की ओर से इनके रखरखाव और सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कई वार्डों में लोग कचरा सड़क किनारे या खुले स्थानों पर फेंकने को मजबूर हैं, जिससे गंदगी की समस्या बढ़ रही है। बौंसी | नगर पंचायत गठन के लगभग चार वर्ष बीत जाने के बाद भी बौंसी नगर पंचायत में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं दिख रही है। नगरवासियों का आरोप है कि विकास कार्य अब तक केवल आश्वासनों तक सीमित है, जबकि जलापूर्ति, स्वच्छता, नाला, सड़क एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति लगातार बदहाल बनी हुई है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और नगर पंचायत प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि नगर पंचायत बनने के समय उन्होंने विकास की उम्मीद में मतदान किया था, लेकिन चार वर्षों बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। कई स्थानों पर नालियों की सफाई नहीं होने, सड़कों के जर्जर होने तथा गलियों में टूटे ढक्कनों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। नगरवासियों के अनुसार, विभिन्न समस्याओं को लेकर कई बार आंदोलन और विरोध प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। बाराहाट क्षेत्र में बारिश शुरू होते ही पंजवारा रेलवे हाल्ट के निचले हिस्से में बने पुल पर जलजमाव की पुरानी समस्या फिर सामने आ गई है। हर साल की तरह इस बार भी तेज बारिश के बाद पुल के नीचे पानी जमा हो गया, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर हर बारिश में लोगों को इसी समस्या से क्यों जूझना पड़ता है, जबकि यह बिहार-झारखंड को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भागलपुर-गोड्डा मुख्य सड़क पर स्थित इस पुल से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है। लेकिन बारिश के दौरान पुल के नीचे पानी भर जाने से खासकर बाइक, ऑटो और छोटे वाहनों को काफी कठिनाई होती है। कई बार छोटे हादसे भी हो चुके हैं, फिर भी समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हो रही है। बांका | बांका नगर परिषद द्वारा शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर विभिन्न वार्डों में लगाए गए स्टील डस्टबीन अब बदहाली का शिकार होते दिख रहे हैं। कई स्थानों पर डस्टबीन पूरी तरह से गायब हो चुके हैं, जबकि कहीं केवल उनका स्टैंड ही बचा हुआ है। इससे नगर परिषद की निगरानी व्यवस्था और सरकारी राशि के उपयोग पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए लगाए गए डस्टबिन कुछ ही दिनों में या तो क्षतिग्रस्त हो गए या फिर चोरी हो गए, लेकिन नगर परिषद की ओर से इनके रखरखाव और सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कई वार्डों में लोग कचरा सड़क किनारे या खुले स्थानों पर फेंकने को मजबूर हैं, जिससे गंदगी की समस्या बढ़ रही है।  

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