गोविंदगढ़। कहते हैं कि कठिन परिस्थितियां इंसान को या तो तोड़ देती हैं या फिर उसे इतना मजबूत बना देती हैं कि वह इतिहास रच देता है। गोविंदगढ़ कस्बे के कुंडा मंदिर क्षेत्र निवासी रौनक खंडेलवाल ने संघर्ष, जिम्मेदारियों और कठिन हालातों के बीच ऐसा मुकाम हासिल किया, जिस पर आज पूरा क्षेत्र गर्व कर रहा है। साधारण परिवार से आने वाले रौनक ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) परीक्षा में ऑल इंडिया 76वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन किया है।
रौनक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। कोरोना काल में पिता के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर की पूरी जिम्मेदारी अचानक रौनक के कंधों पर आ गई। दो बहनों की परवरिश, परिवार का खर्च और भविष्य की चिंता के बीच उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया। उन्होंने संघर्ष को ही अपनी ताकत बना लिया और अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ते रहे।

दिन में नौकरी और रात में की पढ़ाई
बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रौनक ने नौकरी के साथ-साथ यूपीएससी और भारतीय वन सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। दिनभर काम और रातभर पढ़ाई के कठिन दौर में भी उन्होंने हार नहीं मानी। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उनका अनुशासन और मेहनत लगातार जारी रही। आखिरकार उनकी तपस्या रंग लाई और उन्होंने आईएफएस परीक्षा में ऑल इंडिया 76वीं रैंक हासिल कर सफलता का परचम लहरा दिया।
गोविंदगढ़ कस्बे में निकली स्वागत रैली
रविवार को गोविंदगढ़ कस्बे में रौनक का भव्य स्वागत किया गया। कस्बे के मुख्य बाजारों में जुलूस निकाला गया, जहां लोगों ने जगह-जगह फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया। युवाओं में रौनक की सफलता को लेकर खास उत्साह देखने को मिला।
सफलता देखने के लिए पिता जीवित नहीं
रौनक ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के संस्कार और कठिन परिस्थितियों से मिली सीख को दिया। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि उनके पिता आढ़त का काम करते थे। एक दिन पिता ने उनसे कहा था, ‘तुझे तो बहीखाता भी पढ़ना नहीं आता।’ रौनक बताते हैं कि यही बात उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई। उन्होंने ठान लिया कि एक दिन ऐसा मुकाम हासिल करेंगे, जिस पर पिता को गर्व हो। हालांकि, रौनक के पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। यदि आज वे होते तो अपने बेटे की सफलता पर जरूर गर्व कर रहे होते।
युवाओं के लिए रौनक का संदेश
रौनक ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि मेहनत ही सफलता का मूल मंत्र है और इसका कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने कहा कि कई युवा तैयारी के नाम पर समय बर्बाद कर देते हैं और खुद से ही बेईमानी करते हैं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता जरूर मिलती है।


