विदेशी बाजारों में दाम टूटने से Edible Oil सस्ता, जानें आपके किचन बजट पर क्या होगा असर

विदेशी बाजारों में दाम टूटने से Edible Oil सस्ता, जानें आपके किचन बजट पर क्या होगा असर

बीते सप्ताह विदेशी बाजारों में खद्य तेलों के दाम टूटने के बीच देश के तेल-तिलहन बाजार में सोयाबीन तेल, कच्चे पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल के दाम गिरावट दर्शाते बंद हुए। वहीं कम उपलब्धता और सोयाबीन के तेल-रहित खल (डीओसी) की स्थानीय मांग से सोयाबीन तिलहन और बिनौला तेल के दाम सुधार के साथ बंद हुए। विदेशों में खाद्य तेलों के दाम में आई गिरावट और सुस्त कामकाज के बीच सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने रहे।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह से पहले के हफ्ते में जिस सोयाबीन डीगम तेल का दाम 1,345-1,350 डॉलर प्रति टन था वह बीते सप्ताह घटकर 1,300-1,305 डॉलर प्रति टन रह गया। इस गिरावट का असर बाकी तेल-तिलहनों पर आया जिससे अधिकांश तेल-तिलहन के दाम टूट गये।
उन्होंने कहा कि विदेशों में इस गिरावट के असर से सोयाबीन तेल तथा पाम-पामोलीन तेल में भी गिरावट आई लेकिन जितना सोयाबीन डीगम के दाम टूटे हैं, उतना असर पाम-पामोलीन तेल के दाम पर नहीं दिखा।

संभवत: इस कम गिरावट का कारण गर्मी के मौसम में पाम-पामोलीन तेल की औद्योगिक मांग का होना था।
सूत्रों ने कहा कि कम उपलब्धता और सोयाबीन के तेल-रहित खल (डीओसी) की अच्छी स्थानीय मांग की वजह से बीते सप्ताह सोयाबीन तिलहन के दाम में सुधार देखा गया। सोयाबीन का स्टॉक सिर्फ सरकार की एजेंसियों या फिर किसानों के पास है। महाराष्ट्र के सांगली में अगले 20-22 दिन में सोयाबीन की बिजाई शुरू हो सकती है। इस बार किसानों को सोयाबीन के अच्छे दाम मिले हैं जिससे आगे इसकी खेती का रकबा बढ़ने की संभावना देखी जा रही है। आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने ही होंगे।

उन्होंने कहा कि आयातित तेलों का दाम घटने के बीच देश में सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन के दाम बीते सप्ताह इससे पिछले सप्ताहांत के बंद स्तर पर स्थिर बने रहे। मूंगफली की थोड़ी बहुत मात्रा में गर्मी की फसल भी आने वाली है।
सूत्रों ने कहा कि जिस हिसाब से मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया गया है, उस हिसाब से मूंगफली का बाजार नहीं है। इसका बाजार विकसित करने की ओर भी सरकार को ध्यान देना होगा क्योंकि मूंगफली, सरसों जैसे खाद्य तेलों का कोई विकल्प ढूंढ़ना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि कम उपलब्धता के बीच बीते सप्ताह बिनौला तेल के दाम में भी सुधार दिखा।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 7,000-7,025 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों तेल 14,350 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल क्रमश: 2,400-2,500 रुपये और 2,400-2,545 रुपये टिन (15 किलो) पर स्थिर रुख लिए बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज का थोक भाव क्रमश: 425-425 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 6,950-7,000 रुपये और 6,600-6,675 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
दूसरी ओर, दिल्ली में सोयाबीन तेल 325 रुपये की गिरावट के साथ 15,675 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 275 रुपये की गिरावट के साथ 15,575 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 300 रुपये की गिरावट के साथ 12,250 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

बीते सप्ताहांत मूंगफली तिलहन 6,650-7,125 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 15,750 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,500-2,800 रुपये प्रति टिन पर स्थिरता के रुख के साथ बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 25 रुपये की गिरावट के साथ 13,625 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 50 रुपये घटकर 15,400 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 25 रुपये की गिरावट के साथ 14,275 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
बिनौला तेल का दाम 150 रुपये के सुधार के साथ 15,250 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

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