किशनगंज शहर के बीचों-बीच बहने वाली रमजान नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल की है। नदी के जीर्णोद्धार कार्य के साथ अब इसे महानंदा नदी से जोड़ने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। जिला पदाधिकारी विशाल राज के नेतृत्व में इस महत्वाकांक्षी योजना पर तेजी से काम चल रहा है। पूर्व में डीएम विशाल राज द्वारा गठित एक टीम ने नदी को महानंदा से जोड़ने की संभावनाओं पर जांच की थी। इस जांच में कुछ तकनीकी और भौगोलिक बाधाएं सामने आई थीं। प्राकृतिक जल प्रवाह को बहाल करना लक्ष्य इसके बावजूद, अब उच्च स्तरीय जांच और विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य रमजान नदी में प्राकृतिक जल प्रवाह को बहाल करना है, ताकि यह शहर की पहचान रही नदी अपने पुराने स्वरूप में लौट सके। लगभग 9 किलोमीटर लंबी रमजान नदी वर्षों से अतिक्रमण और जलस्रोतों के सूखने के कारण अपना अस्तित्व खोने की कगार पर थी। हालांकि, अब नदी के पुनर्जीवन के लिए युद्धस्तर पर कार्य जारी है। इसमें नदी किनारे सड़क निर्माण, छठ घाटों का निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। महानंदा नदी से जुड़ने के बाद सालभर बना रहेगा प्रवाह प्रशासन का मानना है कि महानंदा नदी से जुड़ने के बाद रमजान नदी में सालभर जल प्रवाह बना रहेगा। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ मिलेगा, बल्कि शहरवासियों को भी एक सुंदर जलधारा और बेहतर सार्वजनिक स्थल का लाभ मिल सकेगा। इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखा जा रहा है। किशनगंज शहर के बीचों-बीच बहने वाली रमजान नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल की है। नदी के जीर्णोद्धार कार्य के साथ अब इसे महानंदा नदी से जोड़ने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। जिला पदाधिकारी विशाल राज के नेतृत्व में इस महत्वाकांक्षी योजना पर तेजी से काम चल रहा है। पूर्व में डीएम विशाल राज द्वारा गठित एक टीम ने नदी को महानंदा से जोड़ने की संभावनाओं पर जांच की थी। इस जांच में कुछ तकनीकी और भौगोलिक बाधाएं सामने आई थीं। प्राकृतिक जल प्रवाह को बहाल करना लक्ष्य इसके बावजूद, अब उच्च स्तरीय जांच और विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य रमजान नदी में प्राकृतिक जल प्रवाह को बहाल करना है, ताकि यह शहर की पहचान रही नदी अपने पुराने स्वरूप में लौट सके। लगभग 9 किलोमीटर लंबी रमजान नदी वर्षों से अतिक्रमण और जलस्रोतों के सूखने के कारण अपना अस्तित्व खोने की कगार पर थी। हालांकि, अब नदी के पुनर्जीवन के लिए युद्धस्तर पर कार्य जारी है। इसमें नदी किनारे सड़क निर्माण, छठ घाटों का निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। महानंदा नदी से जुड़ने के बाद सालभर बना रहेगा प्रवाह प्रशासन का मानना है कि महानंदा नदी से जुड़ने के बाद रमजान नदी में सालभर जल प्रवाह बना रहेगा। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ मिलेगा, बल्कि शहरवासियों को भी एक सुंदर जलधारा और बेहतर सार्वजनिक स्थल का लाभ मिल सकेगा। इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखा जा रहा है।


