समस्तीपुर में CS बोले- चमकी बुखार को लेकर विभाग अलर्ट:बच्चों को तेज धूप से बचाएं, सिम्टम्स दिखने पर तुरंत पहुंचे हॉस्पिटल

समस्तीपुर में CS बोले- चमकी बुखार को लेकर विभाग अलर्ट:बच्चों को तेज धूप से बचाएं, सिम्टम्स दिखने पर तुरंत पहुंचे हॉस्पिटल

समस्तीपुर सदर अस्पताल में चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम – एईएस) से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। बढ़ती गर्मी और चमकी बुखार के संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिला अधिकारी के निर्देश पर यह विशेष अभ्यास किया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। इस मॉक ड्रिल की निगरानी चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. नागमणि राज के नेतृत्व में की गई। आपातकालीन वार्ड से लेकर पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड तक पूरे अस्पताल परिसर में स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रियता देखी गई। मॉक ड्रिल के दौरान चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों के इलाज की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया। जरूरत के अनुसार दवाइयां दी गईं अभ्यास के तहत एक काल्पनिक मरीज को इमरजेंसी वार्ड में लाया गया। वहां से उसे तत्काल पीकू वार्ड में स्थानांतरित किया गया। वार्ड में तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने बिना देर किए बच्चे को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। जरूरत के अनुसार दवाइयां दी गईं और इलाज से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान जिला सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार भी मौजूद रहे और उन्होंने पूरे आयोजन का जायजा लिया। अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की तत्परता और व्यवस्थाओं को परखा गया, ताकि वास्तविक परिस्थिति में किसी प्रकार की परेशानी न हो। डॉ. नागमणि राज ने बताया कि गर्मी के मौसम में चमकी बुखार का खतरा बढ़ जाता है, खासकर छोटे बच्चों में यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग पहले से ही पूरी तैयारी में जुटा हुआ है। प्रत्येक बेड पर स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की डॉ. राज ने यह भी बताया कि सदर अस्पताल में चमकी बुखार से संबंधित सभी जरूरी दवाइयां उपलब्ध करा दी गई हैं। पीकू वार्ड में आधा दर्जन से अधिक बेड विशेष रूप से तैयार किए गए हैं और प्रत्येक बेड पर स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई है। मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई बच्चा चमकी बुखार से पीड़ित होकर अस्पताल पहुंचता है, तो उसे तुरंत और सही इलाज मिल सके। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क और सजग है जिला सिविल सर्जन डॉक्टर राजीव कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क और सजग है। सिर्फ सदर अस्पताल ही नहीं, बल्कि अनुमंडलीय अस्पतालों में भी चमकी बुखार से संबंधित दवाइयों और इलाज की समुचित व्यवस्था कर दी गई है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बच्चों का विशेष ध्यान रखें, तेज धूप से बचाएं और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें। कुल मिलाकर, समस्तीपुर स्वास्थ्य विभाग की यह पहल आने वाले समय में चमकी बुखार जैसी गंभीर बीमारी से निपटने में काफी मददगार साबित हो सकती है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि किसी भी बच्चे की जान इलाज के अभाव में न जाए और समय रहते हर मरीज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। समस्तीपुर सदर अस्पताल में चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम – एईएस) से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। बढ़ती गर्मी और चमकी बुखार के संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिला अधिकारी के निर्देश पर यह विशेष अभ्यास किया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। इस मॉक ड्रिल की निगरानी चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. नागमणि राज के नेतृत्व में की गई। आपातकालीन वार्ड से लेकर पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड तक पूरे अस्पताल परिसर में स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रियता देखी गई। मॉक ड्रिल के दौरान चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों के इलाज की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया। जरूरत के अनुसार दवाइयां दी गईं अभ्यास के तहत एक काल्पनिक मरीज को इमरजेंसी वार्ड में लाया गया। वहां से उसे तत्काल पीकू वार्ड में स्थानांतरित किया गया। वार्ड में तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने बिना देर किए बच्चे को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। जरूरत के अनुसार दवाइयां दी गईं और इलाज से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान जिला सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार भी मौजूद रहे और उन्होंने पूरे आयोजन का जायजा लिया। अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की तत्परता और व्यवस्थाओं को परखा गया, ताकि वास्तविक परिस्थिति में किसी प्रकार की परेशानी न हो। डॉ. नागमणि राज ने बताया कि गर्मी के मौसम में चमकी बुखार का खतरा बढ़ जाता है, खासकर छोटे बच्चों में यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग पहले से ही पूरी तैयारी में जुटा हुआ है। प्रत्येक बेड पर स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की डॉ. राज ने यह भी बताया कि सदर अस्पताल में चमकी बुखार से संबंधित सभी जरूरी दवाइयां उपलब्ध करा दी गई हैं। पीकू वार्ड में आधा दर्जन से अधिक बेड विशेष रूप से तैयार किए गए हैं और प्रत्येक बेड पर स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई है। मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई बच्चा चमकी बुखार से पीड़ित होकर अस्पताल पहुंचता है, तो उसे तुरंत और सही इलाज मिल सके। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क और सजग है जिला सिविल सर्जन डॉक्टर राजीव कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क और सजग है। सिर्फ सदर अस्पताल ही नहीं, बल्कि अनुमंडलीय अस्पतालों में भी चमकी बुखार से संबंधित दवाइयों और इलाज की समुचित व्यवस्था कर दी गई है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बच्चों का विशेष ध्यान रखें, तेज धूप से बचाएं और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें। कुल मिलाकर, समस्तीपुर स्वास्थ्य विभाग की यह पहल आने वाले समय में चमकी बुखार जैसी गंभीर बीमारी से निपटने में काफी मददगार साबित हो सकती है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि किसी भी बच्चे की जान इलाज के अभाव में न जाए और समय रहते हर मरीज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *