बोधगया में धर्म संस्कृति संगम का शुभारंभ:अलग-अलग राज्यों से साधु-संत, बौद्ध धर्मावलंबी पहुंचे; डॉ. इंद्रेश बोले- भाईचारा ही सच्चे धर्म की पहचान है

बोधगया में धर्म संस्कृति संगम का शुभारंभ:अलग-अलग राज्यों से साधु-संत, बौद्ध धर्मावलंबी पहुंचे; डॉ. इंद्रेश बोले- भाईचारा ही सच्चे धर्म की पहचान है

अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल बोधगया एक बार फिर धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के रंग में रंग गया। गुरुवार से चार दिवसीय धर्म संस्कृति संगम का शुभारंभ हुआ। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे साधु-संत, विद्वान, बौद्ध धर्मावलंबी और गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी से माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो उठा। कार्यक्रम के पहले दिन धार्मिक अनुष्ठान, वैचारिक संगोष्ठी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ शुरुआत हुई। मंच से समाज में एकता, समरसता और सद्भाव का संदेश दिया गया। आयोजन स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं और आगंतुकों की भीड़ उमड़ी रही। बोधगया की पावन धरती पर सनातन परंपरा और बौद्ध संस्कृति का संगम लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। बोधगया की धरती से एकजुटता का संदेश मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार शामिल हुए। उन्होंने कहा कि धर्म संस्कृति संगम केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का अभियान है। पिछले 11 वर्षों से यह कार्यक्रम सामाजिक समरसता, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश दे रहा है। गयाजी केवल सनातन परंपरा का केंद्र नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली होने के कारण विश्व शांति का भी प्रतीक है। यहां सभी धर्मों के लोग एक साथ आकर प्रेम, भाईचारा और सहअस्तित्व का संदेश देते हैं। प्रेम, समानता और भाईचारा ही सच्चे धर्म की पहचान है। समाज तभी मजबूत होगा जब लोग विभाजन नहीं, बल्कि एकजुटता की राह चुनेंगे। पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम पर डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत है और जनता अपने मत से हर परिस्थिति का जवाब देती है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल बोधगया एक बार फिर धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के रंग में रंग गया। गुरुवार से चार दिवसीय धर्म संस्कृति संगम का शुभारंभ हुआ। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे साधु-संत, विद्वान, बौद्ध धर्मावलंबी और गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी से माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो उठा। कार्यक्रम के पहले दिन धार्मिक अनुष्ठान, वैचारिक संगोष्ठी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ शुरुआत हुई। मंच से समाज में एकता, समरसता और सद्भाव का संदेश दिया गया। आयोजन स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं और आगंतुकों की भीड़ उमड़ी रही। बोधगया की पावन धरती पर सनातन परंपरा और बौद्ध संस्कृति का संगम लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। बोधगया की धरती से एकजुटता का संदेश मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार शामिल हुए। उन्होंने कहा कि धर्म संस्कृति संगम केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का अभियान है। पिछले 11 वर्षों से यह कार्यक्रम सामाजिक समरसता, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश दे रहा है। गयाजी केवल सनातन परंपरा का केंद्र नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली होने के कारण विश्व शांति का भी प्रतीक है। यहां सभी धर्मों के लोग एक साथ आकर प्रेम, भाईचारा और सहअस्तित्व का संदेश देते हैं। प्रेम, समानता और भाईचारा ही सच्चे धर्म की पहचान है। समाज तभी मजबूत होगा जब लोग विभाजन नहीं, बल्कि एकजुटता की राह चुनेंगे। पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम पर डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत है और जनता अपने मत से हर परिस्थिति का जवाब देती है।  

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