बक्सर | आधुनिकता के दौर में जहां पारंपरिक रस्में धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही हैं, वहीं जिले में एक विवाह समारोह ने परंपरा के पुनर्जीवन की मिसाल पेश की। ब्रह्मर्षि समाज के अध्यक्ष एवं प्रतिष्ठित व्यवसायी डॉ. राकेश राय उर्फ कल्लू राय ने अपनी पुत्री की विदाई डोली में कराकर न सिर्फ पुरानी परंपरा को जीवंत किया, बल्कि कहार समाज के लिए रोजगार का एक संदेश भी दिया। शहर के सोमेश्वर स्थान स्थित बगीचा उत्सव लॉन में आयोजित इस भव्य समारोह में आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला। विदाई के समय चार कहारों द्वारा उठाई गई फूलों से सजी डोली ने लोगों को पुराने समय की याद दिला दी। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया और पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया। बताया जाता है कि कल्लू राय के पिता डॉ राधामोहन राय जिले के प्रतिष्ठित चिकित्सक हैं। ऐसे समृद्ध परिवार द्वारा इस परंपरा को निभाना समाज के लिए एक प्रेरणादायक नजीर माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह के आयोजन बढ़ें तो डोली ढोने वाले कहारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो सकता है। इस पहल को सामाजिक रूप से सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। बक्सर | आधुनिकता के दौर में जहां पारंपरिक रस्में धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही हैं, वहीं जिले में एक विवाह समारोह ने परंपरा के पुनर्जीवन की मिसाल पेश की। ब्रह्मर्षि समाज के अध्यक्ष एवं प्रतिष्ठित व्यवसायी डॉ. राकेश राय उर्फ कल्लू राय ने अपनी पुत्री की विदाई डोली में कराकर न सिर्फ पुरानी परंपरा को जीवंत किया, बल्कि कहार समाज के लिए रोजगार का एक संदेश भी दिया। शहर के सोमेश्वर स्थान स्थित बगीचा उत्सव लॉन में आयोजित इस भव्य समारोह में आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला। विदाई के समय चार कहारों द्वारा उठाई गई फूलों से सजी डोली ने लोगों को पुराने समय की याद दिला दी। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया और पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया। बताया जाता है कि कल्लू राय के पिता डॉ राधामोहन राय जिले के प्रतिष्ठित चिकित्सक हैं। ऐसे समृद्ध परिवार द्वारा इस परंपरा को निभाना समाज के लिए एक प्रेरणादायक नजीर माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह के आयोजन बढ़ें तो डोली ढोने वाले कहारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो सकता है। इस पहल को सामाजिक रूप से सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


