उदय भानु बिस्वास की काउंसलिंग पूरी हो गई है। बुधवार को मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने उदय भानु बिस्वास को पुलिस कस्टिडी में सौंप दिया। अब पुलिस ने उदय भानु बिस्वास पर कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है और उसे कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है। संभवत: गुरुवार को सदर पुलिस उदय भानु को कोर्ट में पेश कर सकती है। पहले एक नजर पूरे मामले पर
सदर बाजार थाना क्षेत्र के तेली मोहल्ले में 76 वर्षीय उदय भानु बिस्वास अपनी 36 वर्षीय बेटी प्रियंका बिस्वास के साथ रह रहे थे। उदय भानु बिस्वास शिक्षा विभाग से रिटायर्ड थे तो बेटी प्रियंका बिस्वास MCA की पढ़ाई कर चुकी थी। 11 अप्रैल की शाम प्रियंका का शव उसके बंद मकान से बरामद हुआ। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि पिता उदय भानु बिस्वास चार महीने पहले काला पीलिया से प्रियंका की मौत हो जाने के बाद उसे घर के भीतर ही छोड़कर चले गए। अंदर ही अंदर शव कंकाल बन गया। शक के दायरे में पिता की भूमिका
पहले ही दिन से इस मामले में पिता उदय भानु बिस्वास शक के दायरे में रहे। लेकिन फिर पुलिस को एहसास हुआ कि उदय भानु बिस्वास की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। पुलिस पूछताछ में पिता ने बताया कि प्रियंका का इलाज वह झाड़ फूंक वाले से करा रहा था लेकिन राहत नहीं मिली और उसकी मौत हो गई। वह डर गया और बेटी को छोड़कर हरिद्वार व देहरादून जाकर रहने लगा। पुलिस ने की काउंसलिंग की पैरवी
प्रियंका का शव मिलने के बाद पुलिस ने उदय भानु बिस्वास को हिरासत में लेकर पूछताछ की लेकिन पुलिस को अपने सवालों के जवाब नहीं मिले। उदय भानु बिस्वास की गतिविधियां मानसिक रोगियों के जैसी थीं। तय हुआ कि उदय भानु बिस्वास को मनोचिकित्सकों की देखरेख में रखा जाए ताकि वह उनकी काउंसलिंग कर सकें। 17 अप्रैल को भेजा काउंसलिंग सेंटर
सीएमओ अशोक कटारियां ने पुलिस की पैरवी के अनुसार उदय भानु बिस्वास की काउंसलिंग की प्रक्रिया को शुरु करा दिया। 17 अप्रैल को उसे लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के वार्ड में भर्ती करा दिया गया। यहां मनो चिकित्सकों ने प्रभारी तरुण पाल की देखरेख में उदय भानु बिस्वास की काउंसलिंग शुरु कर दी। बीच में काउंसलिंग का समय भी बढ़ाया गया। गुरुवार को 20 दिन की काउंसलिंग के बाद उदय भानु बिस्वास को रिलीव किया गया।


