Air Fryer Side Effects: आजकल हर घर में Air Fryer तेजी से पॉपुलर हो रहा है। लोग इसे डीप फ्राई का हेल्दी ऑप्शन मानते हैं, क्योंकि इसमें तेल कम लगता है और खाना भी कुरकुरा बन जाता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या एयर फ्रायर पूरी तरह से सेफ है या इससे भी कैंसर का खतरा हो सकता है?
Dr Jayesh Sharma के मुताबिक, एयर फ्रायर असल में कोई जादुई मशीन नहीं है, बल्कि ये एक तरह का छोटा ओवन है जिसमें गर्म हवा घूमती रहती है और उसी से खाना पकता है। थोड़ा सा तेल ऊपर लगाने से खाना क्रिस्पी हो जाता है।
फ्राइड फूड से जुड़े 3 बड़े खतरे
डॉ. शर्मा बताते हैं कि फ्राइड फूड से कैंसर का खतरा 3 चीजों से जुड़ा होता है:
- Acrylamide बनना
जब हम आलू या मैदा जैसी चीजों को बहुत तेज तापमान पर पकाते हैं, तो उनके ऊपर सुनहरा-भूरा लेयर बनता है। इसे Maillard reaction कहते हैं। इसी प्रोसेस में “Acrylamide” नाम का केमिकल बनता है, जिसे संभावित कैंसर पैदा करने वाला माना जाता है। डीप फ्राई में तापमान ज्यादा होता है, इसलिए इसमें Acrylamide ज्यादा बनता है। एयर फ्रायर में भी बनता है, लेकिन मात्रा कम होती है।
- HCAs (हानिकारक केमिकल)
जब तेल को बार-बार गरम किया जाता है और उसमें मीट या प्रोटीन पकाया जाता है, तो “HCAs” (Heterocyclic amines) बनते हैं। ये कैंसर से जुड़े केमिकल माने जाते हैं। एयर फ्रायर में भी HCAs बन सकते हैं, लेकिन डीप फ्राई के मुकाबले काफी कम।
- Trans fats
सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब एक ही तेल को बार-बार गरम किया जाता है। इससे Trans fats बनते हैं, जो दिल और कैंसर दोनों के लिए खतरनाक हैं। अच्छी बात ये है कि एयर फ्रायर में ट्रांस फैट नहीं बनते, क्योंकि इसमें तेल बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता।
तो क्या एयर फ्रायर सेफ है?
डॉ. शर्मा के अनुसार, अगर तुलना करें तो एयर फ्रायर, डीप फ्राई से कम नुकसानदायक है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इसे पूरी तरह हेल्दी मान लिया जाए। अगर आप रोज-रोज एयर फ्रायर में फ्राइड चीजें खाएंगे, तो रिस्क पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
कैसे करें सही इस्तेमाल?
- खाने को ज्यादा ब्राउन या जला हुआ न बनाएं
- कम तेल का इस्तेमाल करें
- बार-बार प्रोसेस्ड फूड खाने से बचें
- ताजे और घर के बने खाने को प्राथमिकता दें
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


