ब्लड प्रेशर हाई रहता है तो डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें, हो सकता है फायदा

ब्लड प्रेशर हाई रहता है तो डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें, हो सकता है फायदा

Blood Pressure Diet Plan: बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर आज के समय में एक छिपा हुआ दुश्मन है जो धीरे-धीरे हमारे शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाता है। अक्सर लोग बीपी बढ़ते ही घबराकर ढेर सारी दवाइयां खाना शुरू कर देते हैं। दवा तो अपनी जगह ठीक है, लेकिन असली इलाज तो आपकी रसोई में ही छिपा है। अगर आप अपने खाने में थोड़ा फेरबदल कर लें, तो बीपी को घर बैठे कंट्रोल किया जा सकता है। आइए डॉक्टर सुनील त्रिपाठी( MBBS, MD) से जानते हैं उन 5 चीजों के बारे में जो बीपी के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।

1. हरी सब्जियां

पालक, मेथी और सरसों जैसी हरी सब्जियां पोटेशियम से भरी होती हैं। पोटेशियम का काम है शरीर से फालतू नमक को बाहर निकालना। जब शरीर में नमक कम होगा, तो नसों पर दबाव भी कम पड़ेगा और बीपी अपने आप नीचे आने लगेगा। तो बस, रोजाना की थाली में एक कटोरी हरी सब्जी जरूर रखें।

2. लहसुन

लहसुन सिर्फ खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता, बल्कि यह दिल का पक्का दोस्त भी है। लहसुन में एलिसिन नाम की चीज होती है जो खून को पतला करने और नसों को खोलने में मदद करती है। अगर आप रोज सुबह खाली पेट लहसुन की एक कली गुनगुने पानी के साथ निगल लें, तो बीपी कंट्रोल करने में बहुत मदद मिलेगी।

3. दही और छाछ

दही में कैल्शियम और अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो न केवल हाजमा ठीक रखते हैं बल्कि बीपी को भी बढ़ने नहीं देते। दोपहर के खाने में एक कटोरी ताजा दही या एक गिलास ठंडी छाछ जरूर लें। यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और नसों को सुकून देता है।

4. ओट्स और दलिया

सुबह के नाश्ते में अगर आप ओट्स या दलिया खाते हैं, तो यह बीपी के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें खूब सारा फाइबर होता है जो नसों की सफाई करता है और खून का बहाव बेहतर बनाता है। यह हल्का नाश्ता है जो आपको दिनभर एनर्जी भी देगा और बीपी को भी काबू में रखेगा।

5. केला

अगर आपको फल खाना पसंद है, तो केला आपके लिए सबसे बेस्ट है। केले में काफी मात्रा में पोटेशियम होता है जो शरीर में नमक के असर को कम करता है। रोजाना एक या दो केले खाने से ब्लड प्रेशर को अचानक बढ़ने से रोका जा सकता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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