गयाजी के शेरघाटी प्रखंड के जोगापुर गांव के मांझी टोला में सोमवार की शाम एक साथ 3 बच्चों की मौत हो गई। घटना उस वक्त हुई जब तीनों आंधी-बारिश के बीच घर से 200 मीटर दूर पेड़ के नीचे आम का टिकोला चुन रहे थे। इसी दौरान गिरी बिजली ने तीनों की जान ले ली। तीनों के साथ एक और नाबालिग था, जिसकी जान बच गई। गांव के लोगों ने बताया कि गांव के बधार में आम का टिकोला चुनने गए चार लड़के बारिश शुरू होते ही घर की ओर भागे थे। लेकिन घर से 200 मीटर पहले ही तीनों की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई। बचे हुए नाबालिग ने बताया कि तीनों लड़कों ने मेरे सामने ही दम तोड़ा, मैं कुछ नहीं कर पाया। मृत तीनों बच्चों के परिजन का क्या कहना है? गांव के लोगों का घटना को लेकर क्या कहना है? तीनों बच्चों के परिवार का बैकग्राउंड क्या है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। आकाशीय बिजली की चपेट में आकर जान गंवाने वाले बच्चों में 15 साल का संदीप मांझी, गौतम मांझी और दिलकश मांझी शामिल है। गांव वालों के मुताबिक, दोपहर बाद तेज आंधी चली। तीनों बच्चे इस आस में घर से आम के बगीचे की ओर भागे कि आम के टिकोले तेज हवा के झोंके में गिरे होंगे। तेज आंधी चलने के थोड़ी देर बाद ही हल्की बारिश शुरू हुई। संदीप, गौतम, दिलकश मांझी के साथ मौजूद शुभम बारिश के शुरू होते ही घर की ओर भागने लगा। उसने अपने तीनों साथियों से भी कहा कि बारिश तेज आएगी, हम लोग भींग जाएंगे, इसलिए घर की ओर चलो। शुभम ने बताया कि मैं घर की ओर हल्की बारिश में भाग रहा था, साथ ही पीछे की ओर मुड़कर भी देख रहा था। मेरे पीछे दिलकश, गौतम और संदीप भी दौड़कर घर की ओर आ रहे थे। शुभम ने बताया कि घर से करीब 200 मीटर पहले हमलोग पहुंचे थे कि अंधेरे के बीच तेज रौशनी हुई और आसमान से कड़कती हुई बिजली खेत में गिरी। दोस्तों को खेत में पड़ा देख शुभम चीखा और गांव की ओर भागा शुभम ने बताया कि तीनों दोस्तों को बेसुध पड़ा देख मैं समझ गया कि मेरे दोस्त बिजली की चपेट में आए हैं। इसके बाद मैं तुरंत चिखता हुआ गांव की ओर दौड़ा। घर पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद गांव के लोग खेत में पहुंचे, लेकिन तब तक दिलकश, संदीप और गौतम की सांसे थम चुकी थी। तीनों की डेडबॉडी आकाशीय बिजली की चपेट में आकर बुरी तरह झुलसी हुई थी। उनके कपड़े फटकर बिखर गए थे। तीनों बच्चों की लाश देखने वाले गांव के लोगों ने कहा कि ऐसा भयावह दृश्य पहले कभी नहीं देखा। अब कहानी तीनों बच्चों की, जिनकी आकाशीय बिजली की चपेट में आकर मौत हुई सबसे मार्मिक कहानी संदीप की है। संदीप के सिर से पहले ही मां-बाप का साया उठ चुका था। दो साल पहले पिता की हत्या हो गई थी। एक साल पहले मां बीमारी से चल बसी थी। दादा रामदास मांझी ही उसे पाल रहे थे। संदीप के दादा रामदास बताते हैं कि पोते का बड़े जतन से पालन-पोषण कर रहा था। सोचा था कि बड़ा होकर संदीप ही मेरा सहारा बनेगा, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। गौतम की मां रंजू कुमारी का भी रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि बेटा गांव में खेल रहा था। आंधी आई तो आम चुनने चला गया। फिर जिंदा लौटकर नहीं आया। उसके पिता बाहर मजदूरी करते हैं। मां बार-बार बस यही कह रही है कि अगर पता होता कि मेरा बेटा आकाशीय बिजली की चपेट में आ जाएगा, तो उसे जाने ही नहीं देती। वहीं, दिलकश की मां की हालत ऐसी है कि आवाज तक नहीं निकल रही। दिलकश के पिता सुरेंद्र मांझी बताते हैं कि मेरे पांच बच्चे हैं। दिलकश छठी कक्षा में पढ़ता था। बड़ा होकर कुछ बनने का सपना देखता था। सोमवार को खाना खाने घर नहीं आया था। बच्चों के साथ खेलते-खेलते चला गया और फिर कभी वापस नहीं लौटा। गांव के लोग बोले- अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक मदद मिली, लेकिन मुआवजा अब तक नहीं आया गांव वालों का कहना है कि मांझी टोला के तीनों बेटे एक साथ चले गए। पूरा टोला सदमे में है। हर आंख नम है। अंतिम संस्कार के दौरान पूरा गांव उमड़ पड़ा। चिताओं की आग के साथ गांव का साहस भी मानो राख हो गया। स्थानीय लोगों में प्रशासन को लेकर नाराजगी भी है। ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार के लिए कुछ आर्थिक मदद जरूर मिली, लेकिन आपदा विभाग की ओर से मिलने वाला मुआवजा अब तक नहीं पहुंचा। लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवार अति पिछड़ा मांझी समाज से हैं। ऐसे में सरकारी मदद उनके लिए बेहद जरूरी है। गुरारू प्रखंड में भी आकाशीय बिजली से हुई शख्स की मौत गुरारू प्रखंड के धानु बीघा गांव में भी सोमवार को दोपहर करीब 3 बजे आकाशीय बिजली गिरने से 35 साल के श्रीकांत यादव की मौके पर ही मौत हो गई। अचानक मौसम खराब होने के साथ तेज गर्जना हुई और ठनका गिरा, जिसकी चपेट में आने से उनकी जान चली गई। घटना के बाद श्रीकांत यादव के परिजन ने कहा कि वो जलावन के लिए लकड़ी लेने गया था, जबकि गांव के कुछ लोग बताते हैं कि श्रीकांत यादव ताड़ी पीने गया था। ताड़ी पीकर लौट रहा था, तभी आकाशीय बिजली की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक का माहौल बना हुआ है। गयाजी के शेरघाटी प्रखंड के जोगापुर गांव के मांझी टोला में सोमवार की शाम एक साथ 3 बच्चों की मौत हो गई। घटना उस वक्त हुई जब तीनों आंधी-बारिश के बीच घर से 200 मीटर दूर पेड़ के नीचे आम का टिकोला चुन रहे थे। इसी दौरान गिरी बिजली ने तीनों की जान ले ली। तीनों के साथ एक और नाबालिग था, जिसकी जान बच गई। गांव के लोगों ने बताया कि गांव के बधार में आम का टिकोला चुनने गए चार लड़के बारिश शुरू होते ही घर की ओर भागे थे। लेकिन घर से 200 मीटर पहले ही तीनों की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई। बचे हुए नाबालिग ने बताया कि तीनों लड़कों ने मेरे सामने ही दम तोड़ा, मैं कुछ नहीं कर पाया। मृत तीनों बच्चों के परिजन का क्या कहना है? गांव के लोगों का घटना को लेकर क्या कहना है? तीनों बच्चों के परिवार का बैकग्राउंड क्या है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। आकाशीय बिजली की चपेट में आकर जान गंवाने वाले बच्चों में 15 साल का संदीप मांझी, गौतम मांझी और दिलकश मांझी शामिल है। गांव वालों के मुताबिक, दोपहर बाद तेज आंधी चली। तीनों बच्चे इस आस में घर से आम के बगीचे की ओर भागे कि आम के टिकोले तेज हवा के झोंके में गिरे होंगे। तेज आंधी चलने के थोड़ी देर बाद ही हल्की बारिश शुरू हुई। संदीप, गौतम, दिलकश मांझी के साथ मौजूद शुभम बारिश के शुरू होते ही घर की ओर भागने लगा। उसने अपने तीनों साथियों से भी कहा कि बारिश तेज आएगी, हम लोग भींग जाएंगे, इसलिए घर की ओर चलो। शुभम ने बताया कि मैं घर की ओर हल्की बारिश में भाग रहा था, साथ ही पीछे की ओर मुड़कर भी देख रहा था। मेरे पीछे दिलकश, गौतम और संदीप भी दौड़कर घर की ओर आ रहे थे। शुभम ने बताया कि घर से करीब 200 मीटर पहले हमलोग पहुंचे थे कि अंधेरे के बीच तेज रौशनी हुई और आसमान से कड़कती हुई बिजली खेत में गिरी। दोस्तों को खेत में पड़ा देख शुभम चीखा और गांव की ओर भागा शुभम ने बताया कि तीनों दोस्तों को बेसुध पड़ा देख मैं समझ गया कि मेरे दोस्त बिजली की चपेट में आए हैं। इसके बाद मैं तुरंत चिखता हुआ गांव की ओर दौड़ा। घर पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद गांव के लोग खेत में पहुंचे, लेकिन तब तक दिलकश, संदीप और गौतम की सांसे थम चुकी थी। तीनों की डेडबॉडी आकाशीय बिजली की चपेट में आकर बुरी तरह झुलसी हुई थी। उनके कपड़े फटकर बिखर गए थे। तीनों बच्चों की लाश देखने वाले गांव के लोगों ने कहा कि ऐसा भयावह दृश्य पहले कभी नहीं देखा। अब कहानी तीनों बच्चों की, जिनकी आकाशीय बिजली की चपेट में आकर मौत हुई सबसे मार्मिक कहानी संदीप की है। संदीप के सिर से पहले ही मां-बाप का साया उठ चुका था। दो साल पहले पिता की हत्या हो गई थी। एक साल पहले मां बीमारी से चल बसी थी। दादा रामदास मांझी ही उसे पाल रहे थे। संदीप के दादा रामदास बताते हैं कि पोते का बड़े जतन से पालन-पोषण कर रहा था। सोचा था कि बड़ा होकर संदीप ही मेरा सहारा बनेगा, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। गौतम की मां रंजू कुमारी का भी रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि बेटा गांव में खेल रहा था। आंधी आई तो आम चुनने चला गया। फिर जिंदा लौटकर नहीं आया। उसके पिता बाहर मजदूरी करते हैं। मां बार-बार बस यही कह रही है कि अगर पता होता कि मेरा बेटा आकाशीय बिजली की चपेट में आ जाएगा, तो उसे जाने ही नहीं देती। वहीं, दिलकश की मां की हालत ऐसी है कि आवाज तक नहीं निकल रही। दिलकश के पिता सुरेंद्र मांझी बताते हैं कि मेरे पांच बच्चे हैं। दिलकश छठी कक्षा में पढ़ता था। बड़ा होकर कुछ बनने का सपना देखता था। सोमवार को खाना खाने घर नहीं आया था। बच्चों के साथ खेलते-खेलते चला गया और फिर कभी वापस नहीं लौटा। गांव के लोग बोले- अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक मदद मिली, लेकिन मुआवजा अब तक नहीं आया गांव वालों का कहना है कि मांझी टोला के तीनों बेटे एक साथ चले गए। पूरा टोला सदमे में है। हर आंख नम है। अंतिम संस्कार के दौरान पूरा गांव उमड़ पड़ा। चिताओं की आग के साथ गांव का साहस भी मानो राख हो गया। स्थानीय लोगों में प्रशासन को लेकर नाराजगी भी है। ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार के लिए कुछ आर्थिक मदद जरूर मिली, लेकिन आपदा विभाग की ओर से मिलने वाला मुआवजा अब तक नहीं पहुंचा। लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवार अति पिछड़ा मांझी समाज से हैं। ऐसे में सरकारी मदद उनके लिए बेहद जरूरी है। गुरारू प्रखंड में भी आकाशीय बिजली से हुई शख्स की मौत गुरारू प्रखंड के धानु बीघा गांव में भी सोमवार को दोपहर करीब 3 बजे आकाशीय बिजली गिरने से 35 साल के श्रीकांत यादव की मौके पर ही मौत हो गई। अचानक मौसम खराब होने के साथ तेज गर्जना हुई और ठनका गिरा, जिसकी चपेट में आने से उनकी जान चली गई। घटना के बाद श्रीकांत यादव के परिजन ने कहा कि वो जलावन के लिए लकड़ी लेने गया था, जबकि गांव के कुछ लोग बताते हैं कि श्रीकांत यादव ताड़ी पीने गया था। ताड़ी पीकर लौट रहा था, तभी आकाशीय बिजली की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।


