हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सोमवार को स्वीकार किया कि यह परिणाम वामपंथी राजनीति के लिए एक “बड़ा झटका” हैं। पार्टी ने विशेष रूप से विभिन्न राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बढ़ती ताकत पर चिंता जताते हुए इसे विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एकजुटता और देश की धर्मनिरपेक्ष राजनीति के लिए एक गंभीर चुनौती बताया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा कि पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी के नतीजे ‘‘भाजपा के नेतृत्व वाली दक्षिणपंथी सांप्रदायिक ताकतों के प्रभुत्व’’ को दर्शाते हैं’’
उन्होंने कहा कि यह सभी धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतों के लिए गहरी चिंता का विषय है।
माकपा महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा, दस साल के निरंतर शासन के बाद एलडीएफ केरल में हार गई। हमारी सरकार ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा पैदा की गई वित्तीय बाधाओं के बावजूद लोगों के कल्याण के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ काम किया था।
उन्होंने कहा कि पार्टी इस उलटफेर के पीछे के कारणों का आकलन करने के लिए व्यापक आत्मनिरीक्षण करेगी।
बेबी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत ‘सांप्रदायिक ताकतों’’ के मजबूत होने का संकेत है।
उन्होंने कहा, ऐसी ध्रुवीकरण वाली स्थिति में भी बंगाल में वामपंथियों ने अपने प्रदर्शन में मामूली सुधार किया है। 30 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में हमारी स्थिति में सुधार हुआ है, हालांकि हमें कहीं बेहतर परिणाम की उम्मीद थी।


