भास्कर न्यूज | इटखोरी नियमों की रक्षा करने वाला वन विभाग खुद ही नियमों को ताक पर रखता नजर आ रहा है। इटखोरी प्रखंड के नगंवा स्थित वन विश्रामागार में नए गेस्ट हाउस के निर्माण के लिए दर्जनों पेड़ों को बिना एनओसी के काट दिया गया। मेहमानों की सुविधा के नाम पर पर्यावरण को दांव पर लगाने के इस मामले ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या है पूरा मामला पुराना गेस्ट हाउस जर्जर हो चुका था। बरसात में छत टपकती थी, दीवारें कमजोर थीं और अतिथियों का ठहरना मुश्किल था। इसी को देखते हुए विभाग ने 1500 स्क्वायर फीट में नया गेस्ट हाउस बनाने का काम शुरू किया। नए भवन में दो बेडरूम, एक हॉल, किचन, दो शौचालय और सामने बरामदा बनाया जाना है। पुराने जर्जर भवन की मरम्मत कर उसे डाइनिंग हॉल के रूप में नए गेस्ट हाउस से जोड़ा जाएगा। नींव के लिए 5×5 फीट के गड्ढे खोदे जा चुके हैं। पिलर में 16, 12 और 10 एमएम का सरिया, एसीसी सीमेंट और चिमनी ईंट का इस्तेमाल हो रहा है। काम तेज रफ्तार में चल रहा है। प्रभारी फॉरेस्टर धर्मेंद्र कुमार सिंह ने खुद स्वीकार किया कि निर्माण के लिए पेड़ काटे गए हैं और इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई। नियम कहते हैं कि अगर कोई आम व्यक्ति वन विभाग का एक भी पेड़ काट ले तो उस पर तुरंत एफआईआर दर्ज होती है। जिले में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं जैसे डाढ़ा और सिमरिया पॉवर ग्रिड, वन विभाग की एनओसी के पेंच में अटकी हैं। लेकिन जब विभाग खुद बिना अनुमति पेड़ काट दे तो कार्रवाई कौन करेगा? आम आदमी पर सीधे एफआईआर, पर विभाग के मामले में आंखें मूंद ली गई हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने नए गेस्ट हाउस की लागत बताने से इनकार कर दिया। एस्टीमेट कितना है, बजट कहां से आया है। कस तकनीकी विभाग से बनाया जा रहा है, इसकी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।


