बर्खास्त को-पायलट का दावा, क्रूज का एक इंजन स्लो था:महेश पटेल बोले -‘आखिरी दम तक अंदर फंसा रहा, किसी को छोड़कर नहीं भागा’

बर्खास्त को-पायलट का दावा, क्रूज का एक इंजन स्लो था:महेश पटेल बोले -‘आखिरी दम तक अंदर फंसा रहा, किसी को छोड़कर नहीं भागा’

बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई है। इनमें 8 महिलाएं, 4 बच्चे और एक पुरुष शामिल हैं। करीब 60 घंटे के रेस्क्यू के बाद सभी शवों को बाहर निकाल लिया गया। 22 लोग हादसे में सुरक्षित बचे हैं। इन 22 लोगों में एक नाम है- महेश पटेल का। महेश ही वह शख्स थे जिनके हाथों में 30 अप्रैल के दिन क्रूज की कमान थी। यही उसके को-पायलट थे। हादसे के बाद मुख्यमंत्री के आदेश पर महेश पटेल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। दैनिक भास्कर ने महेश पटेल से बातचीत की है। हादसे के बाद महेश पटेल सहमे हुए हैं। कहते हैं- वो मंजर ऐसा था जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता। मेरी गलती नहीं थी, लेकिन फिर भी सबसे माफी मांगता हूं। महेश का कहना है कि वे आखिरी दम तक क्रूज के अंदर फंसे रहे, किसी को छोड़कर नहीं भागे। सवाल: जब आप निकले थे तो उस समय क्या हुआ था?
महेश: 30 अप्रैल गुरुवार शाम 5:16 पर बरगी बांध से एक क्रूज निकलता था। हमारा एक चक्कर लगभग 45 मिनट का होता है। इसमें हम 7 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। इसमें 3:30 किलोमीटर जाना और 3:30 किलोमीटर आना होता है। हम लौट रहे थे, उस समय लगभग 6:45 का टाइम रहा होगा। हम किनारे से लगभग 50 मीटर की दूरी पर ही थे और जोर की हवा चलने लगी। हवा लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से थी। मैंने सोचा कि पास में ही चल रहे एलएनटी के ब्रिज के यहां क्रूज को पार्क किया जाए। मैंने अपने स्टाफ से कहा कि हवा तेज है, आप सभी को लाइफ सपोर्ट जैकेट बांट दीजिए। स्टाफ ने सभी को जैकेट बांट दिया। देखते ही देखते क्रूज में पानी भरने लगा। क्रूज का एक इंजन स्लो था जिसने काम करना बंद कर दिया और धीरे-धीरे क्रूज एक तरफ झुकते हुए नदी में गिरने लगा। जब क्रूज पानी में गिर रहा था तब भी मैं अंदर ही था, क्योंकि मेरा केबिन ऊपर की तरफ होता है। जब क्रूज पानी में गिर गया उसके बाद में लहरों ने मुझे बाहर फेंक दिया। मेरा पैर भी रैलिंग में फंस चुका था। मैं जैसे ही बाहर निकला किनारे पर लोगों ने मुझे बैठाया और अस्पताल पहुंचाया। महेश: क्रूज में 30 लोग सवार थे, जिसमें 6 बच्चे थे। 29 लोगों के पास टिकट था। एक के पास नहीं था। कुछ बच्चों के टिकट नहीं लगे थे। ऊपर से फोन आया कि 29 लोगों के टिकट हैं, एक फ्री है, आप निकल जाइए। यह हादसा होने के बाद मुझे बाद में पता चला कि चार-पांच लोग एक्स्ट्रा थे जिनके पास टिकट नहीं था। टिकट काटने और टिकट चेक करने का काम नीचे से ही होता है। महेश: 3 साल पहले क्रूज का मेंटेनेंस हुआ था। तब से क्रूज एकदम नया जैसा था। बाकी छोटे-मोटे मेंटेनेंस होते रहते थे। यदि कोई छोटी-मोटी खराबी होती थी तो हैदराबाद की कंपनी द्वारा हमें बताया जाता था कि किस तरह ठीक किया जा सकता है और क्या खराबी है। महेश: क्रूज को मैं पिछले 10 साल से चला रहा हूं। 2012 में ट्रेनिंग ली थी। ट्रेनिंग हमारी 28 दिन की थी। हमें क्रूज चलाना, क्रम में बैठे लोगों को आपातकाल स्थिति में कैसे बचाया जाता है, इसकी ट्रेनिंग दी जाती है। महेश: मुझे ऊपर से किसी भी तरह का कोई निर्देश नहीं मिला था कि क्रूज संचालन रोकना है या येलो अलर्ट जारी है। हमें इस बारे में स्पष्ट निर्देश दिए जाते तो हम कभी भी क्रूज को पानी में नहीं उतारते। पूरी खबर पढ़ें… क्रूज हादसे की पीड़िता बोलीं- दवा नहीं, पहले बिल थमाया मध्यप्रदेश के जबलपुर में क्रूज हादसे की चश्मदीद और पीड़िता वाराणसी की सविता वर्मा ने हादसे के बाद के हालात और सिस्टम की संवेदनहीनता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “हम मौत को छूकर वापस आए थे, लेकिन अस्पताल में हमारी हालत से ज्यादा बिल की चिंता दिखाई दी।”पूरी खबर पढ़ें

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