जालोर। गहरे दु:ख के बीच लिया गया एक साहसिक निर्णय तीन लोगों के लिए जीवन की नई उम्मीद बन गया। राजस्थान के जालोर जिले की 35 वर्षीय महिला के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनके पति ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए अंगदान की सहमति दी। इस निर्णय से एक लीवर और दो किडनी का सफल दान हुआ, जिससे अहमदाबाद सिविल अस्पताल में तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सकेगा।
जालोर जिले के जसवंतपुरा गांव की मोवनदेवी बागरी को दुर्घटना में सिर पर गंभीर चोट लगी थी। पहले उन्हें स्थानीय निजी अस्पताल के बाद मेहसाणा स्थित अस्पताल और फिर 28 अप्रेल को अहमदाबाद सिविल अस्पताल लाया गया। इलाज के दौरान 30 अप्रेल को चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया। इस कठिन परिस्थिति में सिविल अस्पताल की अंगदान टीम के डॉ. निमेष देसाई ने महिला के पति वचनारामजी व अन्य को अंगदान का महत्व समझाया। पति ने तुरंत सहमति देकर असाधारण मानवता का परिचय दिया।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि गुजरात स्थापना दिवस के अवसर पर अहमदाबाद सिविल अस्पताल में यह दान हुआ। मोवनदेवी के अंगदान से मिली दो किडनी और एक लीवर सिविल मेडिसिटी कैंपस की किडनी अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित किए जाएंगे।
239वें ब्रेनडेड मरीज के अंगदान
सिविल अस्पताल में अब तक 239 ब्रेनडेड मरीजों के अंगदान किए जा चुके हैं। इनमें 239 अंगदाताओं से 791 अंग प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा 194 नेत्र और 44 त्वचा सहित कुल 238 ऊतक भी दान में मिले हैं। इस तरह सिविल अस्पताल को अब तक कुल 1029 अंग और ऊतक प्राप्त हुए हैं।
सबसे अधिक किडनी मिली दान में
अब तक दान में मिले अंगों में सबसे अधिक 441 किडनी दान में मिली हैं। इसके अलावा 213 लीवर, 19 पैंक्रियाज, 76 हृदय, 6 हाथ, 34 फेफड़े, 2 छोटे आंत, 194 नेत्र और 44 त्वचा का दान प्राप्त हुआ है।


