Migraine Cause: दोपहर के 2 बजे हैं, बाहर सूरज की तेज रोशनी है, लेकिन सीमा (बदला हुआ नाम) ने अपने कमरे की खिड़कियों पर मोटे काले पर्दे डाल रखे हैं। उसे अपने फोन की स्क्रीन से डर लगता है और रसोई में बन रहे खाने की खुशबू उसके लिए असहनीय है। यह कोई साधारण थकान नहीं है, यह माइग्रेन का वह हमला है जिसने उसे एक बार फिर दुनिया से काट दिया है। सीमा की यह स्थिति उन करोड़ों लोगों का प्रतिनिधित्व करती है जो माइग्रेन को सिर्फ सहते नहीं, बल्कि हर दिन उससे लड़ते हैं। आइए, डॉक्टर राहुल यादव(फिजिशियन) और डॉक्टर मनोज जांगिड़ (Homeopathic Expert) से जानते हैं बार-बार होने वाले सिरदर्द का असली कारण।
कैसे पहचानें कि यह सामान्य दर्द नहीं माइग्रेन है?
- सिर के आधे हिस्से में तेज धड़कन जैसा महसूस होना।
- रोशनी और आवाज से परेशानी।
- दर्द के साथ जी मिचलाना या उबकाई आना।
- आंखों के सामने धुंधलापन, काले धब्बे या बिजली जैसी चमक दिखना।
क्यों होता है माइग्रेन?
माइग्रेन के सटीक कारणों पर अभी भी शोध जारी है, लेकिन मुख्य रूप से यह मस्तिष्क में रसायनों (जैसे सेरोटोनिन) के असंतुलन और नसों की अति-संवेदनशीलता के कारण होता है। इसके प्रमुख ट्रिगर्स में महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले बदलाव। तेज धूप, तेज गंध (परफ्यूम या पेंट), और मौसम में अचानक बदलाव। नींद की कमी, खाली पेट रहना या बहुत अधिक कैफीन का सेवन शामिल हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
डॉ. राहुल यादव (Physician)- माइग्रेन के मरीजों को अक्सर ओवर-द-काउंटर पेनकिलर लेने की आदत होती है, जो खतरनाक है। इससे मेडिकेशन ओवरयूज हेडएक हो सकता है। मरीज को अपने ट्रिगर्स की एक डायरी बनानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि किस चीज से दर्द बढ़ रहा है। समय पर भोजन और पर्याप्त पानी सबसे पहला बचाव है।
डॉ. मनोज जांगिड़ (Homeopathic Expert)- होम्योपैथी के अनुसार, माइग्रेन एक ऐसी बीमारी है जिसका संबंध व्यक्ति की मानसिक स्थिति और उसके स्वभाव से भी होता है। होम्योपैथी में हम केवल दर्द का इलाज नहीं करते, बल्कि व्यक्ति के पूरे कॉन्स्टिट्यूशन को देखते हैं। यह नसों की संवेदनशीलता को धीरे-धीरे कम करने में मदद करती है, जिससे बार-बार होने वाले हमलों की तीव्रता कम हो जाती है।”
बचाव के उपाय
- सोने और जागने का समय निश्चित रखें।
- मैग्नीशियम युक्त आहार लें।
- लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करने से बचें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


