जमुई के बरहट प्रखंड अंतर्गत नुमर पंचायत में सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना जमीनी हकीकत में दम तोड़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से खोले गए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थिति चिंताजनक है। यहां इलाज से ज्यादा अव्यवस्था और लापरवाही का आलम दिखता है, जिससे ग्रामीणों का भरोसा डगमगाने लगा है। गर्भवती महिलाओं की देखभाल सबसे अधिक प्रभावित सबसे गंभीर स्थिति गर्भवती महिलाओं की देखभाल को लेकर सामने आई है। विभाग की ओर से भेजी गई प्रसव जांच मेज महीनों से धूल फांक रही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि यहां सुरक्षित प्रसव और नियमित जांच की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि मजबूरी में उन्हें प्रसव और जांच के लिए दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार देर से इलाज मिलने का जोखिम भी बना रहता है। जनरल वार्ड की बदहाली—बिना गद्दे-बेडशीट के बेड अस्पताल के जनरल वार्ड की स्थिति भी बेहद खराब है। मरीजों के लिए बनाए गए बेड पर न तो गद्दा है और न ही बेडशीट। ऐसे में मरीजों को जमीन या असुविधाजनक हालात में रहने को मजबूर होना पड़ता है। यह स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े करती है, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। ओपीडी में धूल, उपकरण बिखरे पड़े ओपीडी कक्ष में टेबल पर जमी धूल यह दर्शाती है कि यहां नियमित रूप से मरीजों का इलाज नहीं हो रहा। वजन मापने वाली मशीन जमीन पर बिखरी पड़ी है, जबकि अन्य चिकित्सा उपकरण भी इधर-उधर फैले हुए नजर आते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि उनके रखरखाव और उपयोग में भारी लापरवाही बरती जा रही है। उपकरण मौजूद होने के बावजूद उनका उपयोग न होना स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर विफलता को दर्शाता है। 7 हजार आबादी के लिए एकमात्र सहारा, फिर भी सेवाएं ठप करीब 7 हजार से अधिक आबादी वाले नुमर पंचायत के लिए यह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर ही एकमात्र सरकारी स्वास्थ्य सुविधा है। यहां एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और दो एएनएम की तैनाती भी की गई है। इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में नियमित इलाज नहीं होता, जिससे वे यहां आने से कतराते हैं और निजी क्लीनिक या दूर के अस्पतालों का सहारा लेते हैं। गर्मी और बीमारियों के बीच भी नहीं हुई तैयारी गौरतलब है कि भीषण गर्मी और संभावित मौसमी बीमारियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी अस्पतालों को पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया है। लेकिन नुमर पंचायत का यह हेल्थ सेंटर इन निर्देशों को ठेंगा दिखाता नजर आ रहा है। यहां न तो साफ-सफाई का ध्यान रखा जा रहा है और न ही मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। सीएचओ का दावा—अभी पूरी तरह संचालित नहीं हुआ केंद्र ड्यूटी पर तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) का कहना है कि उन्होंने करीब एक महीने पहले ही यहां पदभार संभाला है। उनके अनुसार, अस्पताल अभी पूरी तरह से संचालित नहीं हो पाया है, जिसके कारण मरीजों की संख्या कम है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है और धीरे-धीरे सेवाएं बहाल की जाएंगी। जिला परिषद सदस्य ने भी उठाए सवाल जिला परिषद सदस्य कुमारी गुड़िया ने बताया कि अस्पताल रोजाना खुलता तो है, लेकिन मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का भारी अभाव है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को जिला स्तरीय बैठक में भी उठाया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। उनका कहना है कि बदहाल व्यवस्था के कारण मरीज यहां आने से कतराते हैं, जिससे अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बेहद कम हो गई है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने जताई अनभिज्ञता वहीं, इस संबंध में प्रखंड प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ने कहा कि उन्हें इस स्थिति की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही अस्पताल का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जमीनी स्तर पर क्यों विफल हो रही योजनाएं? यह पूरा मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, तो जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही क्यों सामने आ रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी दावों तक सीमित रहेंगे, या फिर वास्तव में इस बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? ग्रामीणों को सुधार का इंतजार नुमर पंचायत के ग्रामीण अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और खराब हो सकती है। ग्रामीणों की मांग है कि अस्पताल को जल्द पूरी तरह चालू किया जाए, साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए और सभी जरूरी सुविधाएं बहाल की जाएं, ताकि उन्हें बेहतर इलाज के लिए भटकना न पड़े। जमुई के बरहट प्रखंड अंतर्गत नुमर पंचायत में सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना जमीनी हकीकत में दम तोड़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से खोले गए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थिति चिंताजनक है। यहां इलाज से ज्यादा अव्यवस्था और लापरवाही का आलम दिखता है, जिससे ग्रामीणों का भरोसा डगमगाने लगा है। गर्भवती महिलाओं की देखभाल सबसे अधिक प्रभावित सबसे गंभीर स्थिति गर्भवती महिलाओं की देखभाल को लेकर सामने आई है। विभाग की ओर से भेजी गई प्रसव जांच मेज महीनों से धूल फांक रही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि यहां सुरक्षित प्रसव और नियमित जांच की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि मजबूरी में उन्हें प्रसव और जांच के लिए दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार देर से इलाज मिलने का जोखिम भी बना रहता है। जनरल वार्ड की बदहाली—बिना गद्दे-बेडशीट के बेड अस्पताल के जनरल वार्ड की स्थिति भी बेहद खराब है। मरीजों के लिए बनाए गए बेड पर न तो गद्दा है और न ही बेडशीट। ऐसे में मरीजों को जमीन या असुविधाजनक हालात में रहने को मजबूर होना पड़ता है। यह स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े करती है, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। ओपीडी में धूल, उपकरण बिखरे पड़े ओपीडी कक्ष में टेबल पर जमी धूल यह दर्शाती है कि यहां नियमित रूप से मरीजों का इलाज नहीं हो रहा। वजन मापने वाली मशीन जमीन पर बिखरी पड़ी है, जबकि अन्य चिकित्सा उपकरण भी इधर-उधर फैले हुए नजर आते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि उनके रखरखाव और उपयोग में भारी लापरवाही बरती जा रही है। उपकरण मौजूद होने के बावजूद उनका उपयोग न होना स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर विफलता को दर्शाता है। 7 हजार आबादी के लिए एकमात्र सहारा, फिर भी सेवाएं ठप करीब 7 हजार से अधिक आबादी वाले नुमर पंचायत के लिए यह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर ही एकमात्र सरकारी स्वास्थ्य सुविधा है। यहां एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और दो एएनएम की तैनाती भी की गई है। इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में नियमित इलाज नहीं होता, जिससे वे यहां आने से कतराते हैं और निजी क्लीनिक या दूर के अस्पतालों का सहारा लेते हैं। गर्मी और बीमारियों के बीच भी नहीं हुई तैयारी गौरतलब है कि भीषण गर्मी और संभावित मौसमी बीमारियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी अस्पतालों को पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया है। लेकिन नुमर पंचायत का यह हेल्थ सेंटर इन निर्देशों को ठेंगा दिखाता नजर आ रहा है। यहां न तो साफ-सफाई का ध्यान रखा जा रहा है और न ही मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। सीएचओ का दावा—अभी पूरी तरह संचालित नहीं हुआ केंद्र ड्यूटी पर तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) का कहना है कि उन्होंने करीब एक महीने पहले ही यहां पदभार संभाला है। उनके अनुसार, अस्पताल अभी पूरी तरह से संचालित नहीं हो पाया है, जिसके कारण मरीजों की संख्या कम है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है और धीरे-धीरे सेवाएं बहाल की जाएंगी। जिला परिषद सदस्य ने भी उठाए सवाल जिला परिषद सदस्य कुमारी गुड़िया ने बताया कि अस्पताल रोजाना खुलता तो है, लेकिन मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का भारी अभाव है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को जिला स्तरीय बैठक में भी उठाया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। उनका कहना है कि बदहाल व्यवस्था के कारण मरीज यहां आने से कतराते हैं, जिससे अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बेहद कम हो गई है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने जताई अनभिज्ञता वहीं, इस संबंध में प्रखंड प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ने कहा कि उन्हें इस स्थिति की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही अस्पताल का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जमीनी स्तर पर क्यों विफल हो रही योजनाएं? यह पूरा मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, तो जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही क्यों सामने आ रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी दावों तक सीमित रहेंगे, या फिर वास्तव में इस बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? ग्रामीणों को सुधार का इंतजार नुमर पंचायत के ग्रामीण अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और खराब हो सकती है। ग्रामीणों की मांग है कि अस्पताल को जल्द पूरी तरह चालू किया जाए, साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए और सभी जरूरी सुविधाएं बहाल की जाएं, ताकि उन्हें बेहतर इलाज के लिए भटकना न पड़े।


