तारीख- 11 फरवरी 2022 जगह- राबड़ी आवास, पटना विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकार कोटे की सीट के लिए RJD की तरफ से कैंडिडेट की घोषणा होनी थी। पार्टी के दो बाहुबली के करीबी दावेदार थे। पटना सीट पर दानापुर विधायक रीतलाल यादव के साथ अनंत सिंह अपने करीबी मास्टर कार्तिक के लिए दावेदारी कर रहे थे। रीतलाल भारी पड़ रहे थे। तभी तेजस्वी यादव को अनंत सिंह का संदेश आया कि मास्टर के जीत की जिम्मेदारी हमारी होगी। इसके थोड़ी देर बाद लालू यादव ने कार्तिक कुमार को उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा कर दी। ये बस एक बानगी भर है कि 4 साल पहले तक मास्टर कार्तिक और मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह के रिश्ते कैसे रहे हैं। लेकिन, क्या अब दोनों की राहें जुदा हो गई हैं? इसकी चर्चा 27 अप्रैल के बाद से सियासी गलियारे में है। दरअसल, पटना के एक बड़े होटल में मास्टर कार्तिक की बेटी का सगाई समारोह था। लालू यादव से लेकर सूरजभान सिंह और विजय सिन्हा से लेकर अवधेश नारायण सिंह तक, सभी पार्टियों के विधायक, MLC और नेता पहुंचे। एक चेहरा जिनका सभी को बेसब्री से इंतजार था, अनंत सिंह वो मास्टर कार्तिक की बेटी को आशीर्वाद देने नहीं आए। कार्तिक बोले- हमारा रिश्ता बरकरार, शादी में आ सकते हैं भास्कर ने इस पूरे प्रकरण पर MLC कार्तिक कुमार से बात की। उन्होंने बताया, ‘हमारे रिश्ते आज भी हैं। मैंने खुद जाकर उन्हें सगाई समारोह में आने का निमंत्रण दिया था। हमारी मुलाकात हुई थी।’ उन्होंने कहा, ‘हमारा रिश्ता कभी खराब नहीं होगा। उनका स्नेह आज भी बरकरार है। रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। ये भी उसी का एक फेज है। उनके परिवार से उनके भतीजे (दिलीप सिंह के बेटे) कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। जून में शादी है, उसमें वो भी आएंगे।’ अनंत सिंह के चुनावी रणनीतिकार रहे हैं कार्तिक कार्तिक को बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थक ‘कार्तिक मास्टर’ के नाम से जानते हैं। 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद कार्तिक मास्टर और अनंत सिंह की दोस्ती परवान चढ़ी थी। आगे अनंत सिंह के चुनावी रणनीतिकार के रूप में कार्तिक ने खुद को साबित किया। जानकारी है कि अनंत सिंह के लिए सभी राजनीतिक दांव-पेंच पर्दे के पीछे से कार्तिक संभालते थे। 2022 तक कार्तिक ही सब कुछ संभाल रहे थे। 2024 में जब NDA की सरकार बनी तो अनंत सिंह की पत्नी राजद से पाला बदलकर जदयू में शामिल हो गईं थीं, लेकिन मास्टर कार्तिक राजद में ही बने रहे। अब 2025 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह खुद जदयू के टिकट पर मोकामा से चुनाव लड़े। इस दौरान भी कार्तिक उनके साथ नहीं दिखे। जब-जब अनंत सिंह जेल गए, मास्टर कार्तिक ने संभाला मोर्चा 2015 में कार्तिक शिक्षक की नौकरी से वीआरएस लेकर एक्टिव पॉलिटिक्स में आए थे। तब अनंत सिंह जेल में बंद थे। नीतीश कुमार से उनकी अदावत चल रही थी। अनंत सिंह ने जेल से ही निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। जेल के बाहर उनके प्रचार से लेकर चुनाव प्रबंधन का पूरा मोर्चा मास्टर कार्तिक ने संभाला था। अनंत सिंह ने जदयू के नीरज कुमार को 18 हजार से ज्यादा वोट से हराया था। इसके बाद 2020 के विधानसभा चुनाव में एक मामले में फिर से अनंत सिंह जेल में थे। उन्होंने जेल से ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया, बाहर मोर्चा मास्टर कार्तिक ने संभाला। अनंत सिंह राजद के टिकट से चुनाव लड़े थे। इन्होंने जदयू के राजीव लोचन नारायण सिंह को 35 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। 2022 में सजा होने के बाद अनंत सिंह की सदस्यता गई तो उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी मैदान में उतरीं। पूरे चुनाव में कार्तिक इनके साथ साये की तरह बने रहे। नतीजा वह चुनाव जीतने में सफल रहीं। 2022 में पहले MLC फिर मंत्री पद का मिला इनाम 2015 से 2022 तक लगातार मदद करने का इनाम मास्टर कार्तिक को 2022 में मिला। पहले लालू प्रसाद यादव से बोलकर अनंत सिंह ने इन्हें MLC बनवाया। इसके बाद इन्हें मंत्री पद भी मिला। 2022 के महागठबंधन सरकार में ये पहले कानून मंत्री और बाद में गन्ना उद्योग मंत्री बने थे। हालांकि इनके मंत्री बनने पर विवाद बढ़ा और इन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अनंत सिंह कार्तिक कुमार को खुद ‘मास्टर साहब’ कहकर पुकारते हैं। राजनीति में सक्रिय होने से पहले कार्तिक स्कूल में शिक्षक थे। वे मोकामा के रहने वाले हैं। उनके गांव का नाम शिवनार है। कार्तिक मास्टर की पत्नी रंजना कुमारी लगातार दो बार मुखिया बनीं। लगभग 28 साल तक टीचर रहने के बाद कार्तिक 2015 में पॉलिटिक्स में एक्टिव हुए थे। तारीख- 11 फरवरी 2022 जगह- राबड़ी आवास, पटना विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकार कोटे की सीट के लिए RJD की तरफ से कैंडिडेट की घोषणा होनी थी। पार्टी के दो बाहुबली के करीबी दावेदार थे। पटना सीट पर दानापुर विधायक रीतलाल यादव के साथ अनंत सिंह अपने करीबी मास्टर कार्तिक के लिए दावेदारी कर रहे थे। रीतलाल भारी पड़ रहे थे। तभी तेजस्वी यादव को अनंत सिंह का संदेश आया कि मास्टर के जीत की जिम्मेदारी हमारी होगी। इसके थोड़ी देर बाद लालू यादव ने कार्तिक कुमार को उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा कर दी। ये बस एक बानगी भर है कि 4 साल पहले तक मास्टर कार्तिक और मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह के रिश्ते कैसे रहे हैं। लेकिन, क्या अब दोनों की राहें जुदा हो गई हैं? इसकी चर्चा 27 अप्रैल के बाद से सियासी गलियारे में है। दरअसल, पटना के एक बड़े होटल में मास्टर कार्तिक की बेटी का सगाई समारोह था। लालू यादव से लेकर सूरजभान सिंह और विजय सिन्हा से लेकर अवधेश नारायण सिंह तक, सभी पार्टियों के विधायक, MLC और नेता पहुंचे। एक चेहरा जिनका सभी को बेसब्री से इंतजार था, अनंत सिंह वो मास्टर कार्तिक की बेटी को आशीर्वाद देने नहीं आए। कार्तिक बोले- हमारा रिश्ता बरकरार, शादी में आ सकते हैं भास्कर ने इस पूरे प्रकरण पर MLC कार्तिक कुमार से बात की। उन्होंने बताया, ‘हमारे रिश्ते आज भी हैं। मैंने खुद जाकर उन्हें सगाई समारोह में आने का निमंत्रण दिया था। हमारी मुलाकात हुई थी।’ उन्होंने कहा, ‘हमारा रिश्ता कभी खराब नहीं होगा। उनका स्नेह आज भी बरकरार है। रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। ये भी उसी का एक फेज है। उनके परिवार से उनके भतीजे (दिलीप सिंह के बेटे) कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। जून में शादी है, उसमें वो भी आएंगे।’ अनंत सिंह के चुनावी रणनीतिकार रहे हैं कार्तिक कार्तिक को बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थक ‘कार्तिक मास्टर’ के नाम से जानते हैं। 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद कार्तिक मास्टर और अनंत सिंह की दोस्ती परवान चढ़ी थी। आगे अनंत सिंह के चुनावी रणनीतिकार के रूप में कार्तिक ने खुद को साबित किया। जानकारी है कि अनंत सिंह के लिए सभी राजनीतिक दांव-पेंच पर्दे के पीछे से कार्तिक संभालते थे। 2022 तक कार्तिक ही सब कुछ संभाल रहे थे। 2024 में जब NDA की सरकार बनी तो अनंत सिंह की पत्नी राजद से पाला बदलकर जदयू में शामिल हो गईं थीं, लेकिन मास्टर कार्तिक राजद में ही बने रहे। अब 2025 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह खुद जदयू के टिकट पर मोकामा से चुनाव लड़े। इस दौरान भी कार्तिक उनके साथ नहीं दिखे। जब-जब अनंत सिंह जेल गए, मास्टर कार्तिक ने संभाला मोर्चा 2015 में कार्तिक शिक्षक की नौकरी से वीआरएस लेकर एक्टिव पॉलिटिक्स में आए थे। तब अनंत सिंह जेल में बंद थे। नीतीश कुमार से उनकी अदावत चल रही थी। अनंत सिंह ने जेल से ही निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। जेल के बाहर उनके प्रचार से लेकर चुनाव प्रबंधन का पूरा मोर्चा मास्टर कार्तिक ने संभाला था। अनंत सिंह ने जदयू के नीरज कुमार को 18 हजार से ज्यादा वोट से हराया था। इसके बाद 2020 के विधानसभा चुनाव में एक मामले में फिर से अनंत सिंह जेल में थे। उन्होंने जेल से ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया, बाहर मोर्चा मास्टर कार्तिक ने संभाला। अनंत सिंह राजद के टिकट से चुनाव लड़े थे। इन्होंने जदयू के राजीव लोचन नारायण सिंह को 35 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। 2022 में सजा होने के बाद अनंत सिंह की सदस्यता गई तो उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी मैदान में उतरीं। पूरे चुनाव में कार्तिक इनके साथ साये की तरह बने रहे। नतीजा वह चुनाव जीतने में सफल रहीं। 2022 में पहले MLC फिर मंत्री पद का मिला इनाम 2015 से 2022 तक लगातार मदद करने का इनाम मास्टर कार्तिक को 2022 में मिला। पहले लालू प्रसाद यादव से बोलकर अनंत सिंह ने इन्हें MLC बनवाया। इसके बाद इन्हें मंत्री पद भी मिला। 2022 के महागठबंधन सरकार में ये पहले कानून मंत्री और बाद में गन्ना उद्योग मंत्री बने थे। हालांकि इनके मंत्री बनने पर विवाद बढ़ा और इन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अनंत सिंह कार्तिक कुमार को खुद ‘मास्टर साहब’ कहकर पुकारते हैं। राजनीति में सक्रिय होने से पहले कार्तिक स्कूल में शिक्षक थे। वे मोकामा के रहने वाले हैं। उनके गांव का नाम शिवनार है। कार्तिक मास्टर की पत्नी रंजना कुमारी लगातार दो बार मुखिया बनीं। लगभग 28 साल तक टीचर रहने के बाद कार्तिक 2015 में पॉलिटिक्स में एक्टिव हुए थे।


