Gulab Kothari Article “ब्रह्म और माया के मूल स्वरूप में कोई ध्वनि या वाक् नहीं है। शब्द तो आकाश तत्त्व से उत्पन्न होता है। जो माया की एक अभिव्यक्ति है। ब्रह्म का मौन शब्द शून्यता नहीं बल्कि पूर्णता का मौन है। जबकि माया अपने आप में एक शक्ति है जो स्पन्द और प्रकाश पैदा करती है। उसका मौन केवल क्षणिक निवृत्ति है। ब्रह्म का मौन चैतन्य मौन है।” पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बहुचर्चित आलेखमाला है – शरीर ही ब्रह्माण्ड। इसमें विभिन्न बिंदुओं/विषयों की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। गुलाब कोठारी को वैदिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें 2002 में नीदरलैन्ड के इन्टर्कल्चर विश्वविद्यालय ने फिलोसोफी में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें 2011 में उनकी पुस्तक मैं ही राधा, मैं ही कृष्ण के लिए मूर्ति देवी पुरस्कार और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया गया था। ‘शरीर ही ब्रह्माण्ड’ शृंखला में प्रकाशित विशेष लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए लिंक्स पर-
शरीर ही ब्रह्माण्ड : अन्न है उत्पत्ति और विनाश का कारक
शरीर ही ब्रह्माण्ड : स्त्री की दिव्यता
शरीर ही ब्रह्माण्ड: विवाह-विच्छेद प्राणों का नहीं होता
शरीर ही ब्रह्माण्ड Podcast : अभाव की मानसिकता पतन है
शरीर ही ब्रह्माण्ड : माया भीतर द्रष्टा, बाहर विश्व


