बिहार के किसान अब धान-गेहूं के मोह से बाहर निकल रह हैं और दलहन-तिलहन पर ध्यान दे रहे हैं। डिजिटल क्रॉप सर्वे की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, रबी 2025-26 के दौरान खेती का कुल रकबा बढ़कर 23.81 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि खरीफ 2025 में यह 18.89 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था। हालांकि, रबी में गेहूं का दबदबा अब कम होने लगा है। इस सीजन में गेहूं का हिस्सा 60.65% तक सीमित रहा है। जबकि, मक्का 14.73% के साथ दूसरी सबसे बड़ी फसल बनकर उभरी है। इसके अलावा मसूर, सरसों और चना जैसी फसलों की हिस्सेदारी 16% से अधिक हो गई है। वहीं राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव के लिए शॉप एम-थ्री-एच फॉर्मूले पर काम शुरू किया है। मसाला, तिलहन, दलहन, मखाना, मशरूम, मार्केटिंग, शहद और बागवानी पर फोकस किया जा रहा है। खरीफ : धान पर निर्भरता बरकरार खरीफ सीजन में अभी 86.70% रकबे पर धान का कब्जा है। हालांकि, उत्तर बिहार के जिलों में मखाना, जूट, सब्जियां और मसालों की खेती ने जोर पकड़ा है। आम, केला और लीची जैसी नकदी फसलों की ओर किसानों का बढ़ता झुकाव यह बता रहा है कि अब बिहार की कृषि बाजार आधारित मॉडल की ओर बढ़ रही है। बिहार के किसान अब धान-गेहूं के मोह से बाहर निकल रह हैं और दलहन-तिलहन पर ध्यान दे रहे हैं। डिजिटल क्रॉप सर्वे की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, रबी 2025-26 के दौरान खेती का कुल रकबा बढ़कर 23.81 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि खरीफ 2025 में यह 18.89 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था। हालांकि, रबी में गेहूं का दबदबा अब कम होने लगा है। इस सीजन में गेहूं का हिस्सा 60.65% तक सीमित रहा है। जबकि, मक्का 14.73% के साथ दूसरी सबसे बड़ी फसल बनकर उभरी है। इसके अलावा मसूर, सरसों और चना जैसी फसलों की हिस्सेदारी 16% से अधिक हो गई है। वहीं राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव के लिए शॉप एम-थ्री-एच फॉर्मूले पर काम शुरू किया है। मसाला, तिलहन, दलहन, मखाना, मशरूम, मार्केटिंग, शहद और बागवानी पर फोकस किया जा रहा है। खरीफ : धान पर निर्भरता बरकरार खरीफ सीजन में अभी 86.70% रकबे पर धान का कब्जा है। हालांकि, उत्तर बिहार के जिलों में मखाना, जूट, सब्जियां और मसालों की खेती ने जोर पकड़ा है। आम, केला और लीची जैसी नकदी फसलों की ओर किसानों का बढ़ता झुकाव यह बता रहा है कि अब बिहार की कृषि बाजार आधारित मॉडल की ओर बढ़ रही है।


