कैमूर में कॉन्सटेबल को इमरजेंसी वार्ड में बंद कर पीटा:डॉक्टर बोले- पहले जवान ने ही हाथ उठाया, जल्दी इलाज कराने को लेकर दबाव बना रहा था

कैमूर में कॉन्सटेबल को इमरजेंसी वार्ड में बंद कर पीटा:डॉक्टर बोले- पहले जवान ने ही हाथ उठाया, जल्दी इलाज कराने को लेकर दबाव बना रहा था

भभुआ सदर अस्पताल में टाउन थाना के कॉन्सटेबल को बंद कमरे पीटा गया। जिसके बाद जवान के मुंह से खून निकलने लगा है। मारपीट के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि पुलिस जवान ने उनके साथ बदतमीजी की और पहले हाथ पुलिस जवान ने ही उठाया था। घटना की सूचना मिलते ही सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक और नगर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया।
लू लगने के बाद अस्पताल में भर्ती हुआ था जवान
भभुआ टाउन थाना में तैनात कांस्टेबल मोहम्मद इरफान ने अस्पताल कर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लू लगने के कारण मेरी तबीयत खराब थी, जिसके बाद मुझे अस्पताल में भर्ती कर सलाइन (पानी) चढ़ाया जा रहा था। पानी खत्म होने के बाद मेरी नस से खून (Blood) बाहर आने लगा। मैंने वहां मौजूद स्टाफ से इसे बंद करने को कहा, लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। जब मैंने दोबारा आग्रह किया, तो वे बहस करने लगे। नर्सिंग स्टाफ ने अन्य 5-6 साथियों को बुला लिया और मुझे एक कमरे में बंद करके बेरहमी से पीटा। डॉक्टर बोले- पहले मुझ पर हाथ उठाया
अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ जय किशोर ने कांस्टेबल के दावों को नकारते हुए खुद पर हमले की बात कही है। उन्होंने कहा कि मैं वार्ड नंबर 9 में अन्य मरीजों को देख रहा था। इसी दौरान इरफान ने खुद ही अपनी सुई निकाल दी जिससे खून बहने लगा। जब मैं उनके पास पहुंचा, तो उन्होंने बिना किसी बात के मुझ पर हाथ उठा दिया और मारपीट शुरू कर दी। वह कह रहे थे कि केवल उन्हें ही देखा जाए, जबकि मुझे अस्पताल के सभी मरीजों को संभालना होता है। सिविल सर्जन बोले- दोषियों पर कार्रवाई होगी
इस मामले पर आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक ने कहा- इलाज के दौरान स्वास्थ्य कर्मी और पुलिस कांस्टेबल के बीच झड़प की सूचना मिली है।”
यह एक गंभीर मामला है और फिलहाल यह *जांच का विषय* है। हम दोनों पक्षों की बात सुन रहे हैं और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। भभुआ सदर अस्पताल में टाउन थाना के कॉन्सटेबल को बंद कमरे पीटा गया। जिसके बाद जवान के मुंह से खून निकलने लगा है। मारपीट के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि पुलिस जवान ने उनके साथ बदतमीजी की और पहले हाथ पुलिस जवान ने ही उठाया था। घटना की सूचना मिलते ही सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक और नगर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया।
लू लगने के बाद अस्पताल में भर्ती हुआ था जवान
भभुआ टाउन थाना में तैनात कांस्टेबल मोहम्मद इरफान ने अस्पताल कर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लू लगने के कारण मेरी तबीयत खराब थी, जिसके बाद मुझे अस्पताल में भर्ती कर सलाइन (पानी) चढ़ाया जा रहा था। पानी खत्म होने के बाद मेरी नस से खून (Blood) बाहर आने लगा। मैंने वहां मौजूद स्टाफ से इसे बंद करने को कहा, लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। जब मैंने दोबारा आग्रह किया, तो वे बहस करने लगे। नर्सिंग स्टाफ ने अन्य 5-6 साथियों को बुला लिया और मुझे एक कमरे में बंद करके बेरहमी से पीटा। डॉक्टर बोले- पहले मुझ पर हाथ उठाया
अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ जय किशोर ने कांस्टेबल के दावों को नकारते हुए खुद पर हमले की बात कही है। उन्होंने कहा कि मैं वार्ड नंबर 9 में अन्य मरीजों को देख रहा था। इसी दौरान इरफान ने खुद ही अपनी सुई निकाल दी जिससे खून बहने लगा। जब मैं उनके पास पहुंचा, तो उन्होंने बिना किसी बात के मुझ पर हाथ उठा दिया और मारपीट शुरू कर दी। वह कह रहे थे कि केवल उन्हें ही देखा जाए, जबकि मुझे अस्पताल के सभी मरीजों को संभालना होता है। सिविल सर्जन बोले- दोषियों पर कार्रवाई होगी
इस मामले पर आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक ने कहा- इलाज के दौरान स्वास्थ्य कर्मी और पुलिस कांस्टेबल के बीच झड़प की सूचना मिली है।”
यह एक गंभीर मामला है और फिलहाल यह *जांच का विषय* है। हम दोनों पक्षों की बात सुन रहे हैं और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।  

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