गोवंश को ‘राष्ट्रमाता’ दर्जा देने की मांग:अशोकनगर में तहसील स्तर पर गौ सेवकों ने रैली निकाल कर ज्ञापन दिए

गोवंश को ‘राष्ट्रमाता’ दर्जा देने की मांग:अशोकनगर में तहसील स्तर पर गौ सेवकों ने रैली निकाल कर ज्ञापन दिए

अशोकनगर में सोमवार को ‘गो सम्मान आवाहन’ अभियान के तहत जिलेभर से हजारों गोसेवक सड़कों पर उतरे। उन्होंने विभिन्न तहसील कार्यालयों में पहुंचकर गोवंश को ‘राष्ट्रमाता’ का संवैधानिक दर्जा देने और केंद्र स्तर पर गोसेवा मंत्रालय के गठन की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपे। शहर में रैली की शुरुआत युगल सरकार मंदिर से हुई, जहां से गोसेवक पैदल मार्च करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। गोसेवक गौरव यादव ने बताया कि बहादुरपुर, मुंगावली, शाढ़ौरा, नईसराय, ईसागढ़ और चंदेरी सहित जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के ज्ञापन सौंपे गए। ज्ञापन में यह मांग की
सौंपे गए ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 और 51A(ग) का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि संत समाज, गोवैज्ञानिकों और प्रबुद्ध नागरिकों ने अखिल भारतीय वेदलक्षणा गोवंश को ‘राष्ट्रमाता’ या ‘राष्ट्र आराध्या’ का दर्जा देने की मांग उठाई है। इसके साथ ही केंद्र सरकार से ‘केंद्रीय गोसेवा मंत्रालय’ की स्थापना और गोसंरक्षण के लिए एक समान कानून बनाने की अपील की गई है। गोसेवकों ने तर्क दिया कि देश सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भारतीय परंपरा की आधारशिला माने जाने वाले गोवंश को संवैधानिक संरक्षण मिलना आवश्यक है। उन्होंने मार्च 2026 में ब्रज क्षेत्र के दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्वारा वृंदावन के वात्सल्य ग्राम में किए गए गोपूजन का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने प्रेरणास्रोत बताया। गोवंश की संख्या कम होने पर जताई चिंता
ज्ञापन में देशी गोवंश की संख्या में लगातार हो रही कमी पर चिंता जताई गई। इसके प्रमुख कारणों में भूख, सड़क दुर्घटनाएं, तस्करी और अवैध वध को बताया गया। सड़कों और खेतों में भटकते पशुओं की दयनीय स्थिति पर भी प्रकाश डाला गया। प्रमुख मांगों में गोवंश की तस्करी और वध को गैर-जमानती अपराध घोषित करना, गोवंश को ‘विधिक व्यक्ति’ का दर्जा देना, प्रत्येक जिले में आदर्श गोशाला और हर ग्राम पंचायत में नंदीशाला की स्थापना, गो-एम्बुलेंस की व्यवस्था, गोचर भूमि का संरक्षण और स्कूली पाठ्यक्रम में गो-विज्ञान को शामिल करना शामिल है। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी संस्था विशेष का नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना से प्रेरित नागरिकों का स्वस्फूर्त प्रयास है। देखें तस्वीरें

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