राजस्थान के इस जिले में मॉडल लाइब्रेरी की राह में भूमि का रोड़ा, दो बार में डेढ़ करोड़ का बजट वापस

राजस्थान के इस जिले में मॉडल लाइब्रेरी की राह में भूमि का रोड़ा, दो बार में डेढ़ करोड़ का बजट वापस

करौली. जिला मुख्यालय पर मॉडल जिला पुस्तकालय निर्माण में उपयुक्त भूमि का रोड़ा बना हुआ है। ऐसे में करौली में मॉडल लाइब्रेरी का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। नगरपरिषद की ओर से पुस्तकालय के लिए नई भूमि उपलब्ध कराई जानी है। हालांकि जिला पुस्तकालय के लिए वर्ष 2018 में नगरपरिषद ने एक हजार वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध कराई थी, लेकिन उस भूमि को बाद में अनुपयुक्त मानते हुए निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।

इस बीच निर्माण के लिए स्वीकृत डेढ़ करोड़ रुपए की राशि विभाग को वापस जा चुकी है, वहीं नवीन भवन के अभाव में न तो पुस्तकालय विकसित हो पा रहा है और न ही पाठकों को इसका समुचित लाभ मिल रहा है। गौरतलब है कि वर्तमान में जिला मुख्यालय पर भूडारा बाजार में एक रियासतकालीन हवेली में राजकीय सार्वजनिक जिला पुस्तकालय वर्ष 2003 से संचालित हो रहा है, जो क्षतिग्रस्त है।

बारिश के दिनों में तो व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो जाती हैं। यह भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। बारिश में छत से पानी टपकता है और कमरे की छत की पट्टी टूट चुकी है। इसके अलावा स्थानाभाव की भी समस्या है। पार्किंग की भी व्यवस्था नहीं है। इसके चलते पुस्तकालय के लिए नए भवन की दरकार बनी हुई है। भवन के जर्जरहाल होने के कारण पुस्तकालय में अधिक सुविधाएं भी विकसित नहीं हो पा रही हैं।

आवंटित भूमि में सुगम रास्ते की समस्या : हालांकि मॉडल पुस्तकालय नवीन भवन के लिए वर्ष 2018 में नगरपरिषद की ओर से यहां होली खिड़किया बाहर डीटीओ कार्यालय (पुराना भवन) के पीछे एक हजार वर्ग मीटर भूमि आवंटित की गई थी। पुस्तकालय सूत्रों का कहना है कि पुस्तकालय के लिए जो भूमि आवंटित की गई, उसमें सुगम रास्ते की समस्या है। ऐसे में उच्चाधिकारियों की ओर से दूसरे स्थान पर भूमि आवंटन कराने की बात कही गई। इसके बाद से ही नई भूमि की तलाश की जा रही है, जो अभी भी बरकरार है।

पहले 50 लाख, फिर एक करोड़ हुए वापस
मॉडल जिला पुस्तकालय में आधुनिक संसाधन उपलब्ध होंगे। साथ ही पाठकों के लिए पृथक-पृथक कक्षों की सुविधाएं होंगी। इसके लिए राजा राममोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान कोलकाता की ओर से पहली किश्त के रूप में 50 लाख रुपए का बजट भी करीब 7 वर्ष पहले आवंटित कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार बजट आवंटन के बाद प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति आदेश भी जारी हो गए हैं, लेकिन भूमि संबंधी विभिन्न कारणों से निर्माण कार्य प्रारम्भ नहीं हो सका। इससे 50 लाख की राशि वापस चली गई। इसके बाद गत वर्ष भाषा एवं पुस्तकालय विभाग की ओर से भवन निर्माण के लिए एक करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई, लेकिन भूमि संबंधी समस्या यथावत बनी रही। ऐसे में यह राशि भी वित्तीय वर्ष की समाप्ति के साथ वापस हो गई है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि भूमि की उपलब्धता के साथ ही विभाग से फिर से बजट मिल सकेगा।

पुस्तकालय में 22 हजार से अधिक पुस्तकें
अभी पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों सहित अन्य विभिन्न प्रकार की करीब 22 हजार 500 पुस्तकें हैं, लेकिन पुराने भवन में स्थानाभाव, बारिश में पानी की समस्या के चलते पाठकों की संख्या नगण्य सी बनी हुई है। बारिश में तो पुस्तकों को त्रिपाल से ढककर सुरक्षित रखना पड़ता है। सूत्रों का कहना है कि नया भवन बन जाए तो सुविधाएं विकसित होने के साथ पाठकों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकेगी।

लाइब्रेरी के लिए हमने कुछ जमीनें पुस्तकालय विभाग अधिकारियों को बताई थी, लेकिन वह भूमि उन्हें पसंद नहीं आई, वे जिस जगह चाह रहे हैं, वहां भूमि उपलब्ध नहीं है। इस कारण अभी भूमि का मामला अटका हुआ है।
प्रेमराज मीना, एसडीओ व कार्यवाहक आयुक्त, नगरपरिषद करौली

करौली में मॉडल लाइब्रेरी का निर्माण होना है। इसके लिए नगरपरिषद की ओर से पूर्व में आवंटित की गई भूमि तक सुगम रास्ते की समस्या है। इस पर निदेशालय भाषा एवं पुस्तकालय विभाग के उच्चाधिकारियों ने दूसरी भूमि का आवंटन कराने को कहा। नगरपरिषद से दूसरी भूमि के लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है। अभी दूसरी भूमि नहीं मिल सकी है। इस बीच भवन निर्माण के लिए दो बार स्वीकृत हुई करीब डेढ़ करोड़ रुपए की राशि का बजट वापस विभाग को चला गया।
रामनिवास मीना, जिला पुस्तकालयाध्यक्ष, करौली

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