आजकल लोग कर्ज के जाल में बहुत जल्दी फंस जाते हैं क्योंकि लोन लेना बहुत आसान हो गया है। एक फोन कॉल पर पर्सनल लोन, कुछ क्लिक में होम लोन और मिनटों में क्रेडिट कार्ड मिल जाते हैं। लेकिन जितनी आसानी से कर्ज मिलता है उतनी ही तेजी से कर्ज का बोझ भी बढ सकता है।
नौकरी जाना, बीमारी या कोई अचानक आई मुसीबत और इंसान लोन डिफॉल्टर बन जाता है। ऐसे में एक बडा डर होता है कि कहीं बैंक या कोर्ट पूरी जमापूंजी जब्त न कर ले। लेकिन भारतीय कानून ऐसे मामलों में निवेश की गई रकम जैसे कि PPF, EPF, NPS और ग्रेच्युटी को सुरक्षित रखता है।
होम लोन डिफॉल्ट हो तो क्या होगा?
SEBI रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और SahajMoney के फाउंडर अभिषेक कुमार एक जरूरी बात समझाते हैं। उनके मुताबिक अगर किसी ने होम लोन लिया है और वह डिफॉल्ट करता है तो बैंक घर को बेचकर अपना पैसा वसूल कर सकता है क्योंकि घर उस लोन की कोलेटरल यानी गारंटी है। लेकिन अगर घर बिकने के बाद भी बैंक का कुछ पैसा बकाया रह जाए तो बैंक उस शॉर्टफॉल की भरपाई के लिए EPF या PPF पर हाथ नहीं डाल सकता।
MWP एक्ट के तहत ली गई बीमा पॉलिसी
मैरिड वुमन्स प्रॉपर्टी एक्ट 1874 की धारा 6 एक ऐसा कानूनी हथियार है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। अगर कोई पुरुष इस एक्ट के तहत अपनी पत्नी और बच्चों के लिए लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेता है तो पॉलिसी की रकम सीधे परिवार को मिलती है। यहां तक कि पॉलिसीहोल्डर पर भारी कर्ज होने पर भी कोई क्रेडिटर उस बीमा राशि पर दावा नहीं कर सकता।
EPF और ग्रेच्युटी पर किसी का हक नहीं
एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट 1952 की धारा 10(1) के तहत EPF अकाउंट का पैसा न तो कोर्ट जब्त कर सकती है, न किसी को ट्रांसफर किया जा सकता है और न ही इस पर कोई चार्ज लगाया जा सकता है। इसी तरह पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट और सिविल प्रोसीजर कोड की धारा 60 के तहत ग्रेच्युटी भी पूरी तरह सुरक्षित है।
PPF में जमा पैसा भी महफूज
पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF न सिर्फ 80C के तहत टैक्स बचाता है बल्कि PPF एक्ट 1968 के तहत इसे कोर्ट किसी कर्जदार को देने के लिए जब्त नहीं कर सकती। हालांकि एक अपवाद है। अगर इनकम टैक्स अधिकारियों को टैक्स चोरी या धोखाधडी का मामला मिले तो वे PPF को जब्त कर सकते हैं। यानी ईमानदार टैक्सपेयर के लिए PPF पूरी तरह सुरक्षित है।
NPS टियर-1 को भी कोई हाथ नहीं लगा सकता
PFRDA एक्ट 2015 के तहत NPS के टियर-1 अकाउंट में जमा राशि को कोर्ट अटैच नहीं कर सकती। यानी अगर कोई NPS सब्सक्राइबर किसी कारण से कर्ज नहीं चुका पाता तो उसकी रिटायरमेंट सेविंग पूरी तरह सुरक्षित रहती है। यह इंतजाम इसलिए किया गया है ताकि बुढापे की जमापूंजी किसी भी हालत में बनी रहे।
ऐसा क्यों होता है?
EPF, PPF और NPS जैसी स्कीमें लॉन्ग-टर्म फैमिली प्रोटेक्शन के लिए बनाई गई हैं। इनमें नॉमिनी और परिवार का जिक्र होता है इसलिए कानून इन्हें क्रेडिटर्स की पहुंच से दूर रखता है। लेकिन इस सुरक्षा का मकसद कर्जदारों को बचाना नहीं बल्कि उनके परिवार को आर्थिक तबाही से बचाना है।


