देवरिया में लोक निर्माण विभाग (PWD) की टेंडर प्रक्रिया में गंभीर विवाद सामने आया है। विभागीय अधिकारियों पर अनुभव प्रमाण पत्र को अयोग्य घोषित कर कुछ खास ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगा है। इस मामले में ठेकेदार मंजू देवी ने गोरखपुर के चीफ इंजीनियर से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 में जिले में लगभग 400 सड़कों की मरम्मत और नवनिर्माण के लिए टेंडर जारी किए गए थे। इन टेंडरों में बड़ी संख्या में ठेकेदारों ने आवेदन किया था। बाद में 100 से अधिक टेंडरों पर अन्य ठेकेदारों द्वारा प्रहरी ऐप पर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। दस्तावेज प्रहरी ऐप पर अपलोड सार्क सिंधी मिल कॉलोनी निवासी ठेकेदार मंजू देवी पत्नी कृष्णा तिवारी ने आरोप लगाया है कि दोनों खंडों में टेंडर से जुड़े सभी दस्तावेज प्रहरी ऐप पर अपलोड किए जाते हैं। इनकी ऑनलाइन जांच विभागीय उच्चाधिकारी करते हैं, जिसके बाद ऐप टेंडर को पात्र (Responsive) या अपात्र (Non-Responsive) की श्रेणी में रखता है। शिकायत में कहा गया है कि विभागीय अधिकारी प्रहरी ऐप के निर्णय को नजरअंदाज कर मनमर्जी से फैसले ले रहे हैं। आरोप है कि अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए समान प्रकृति की शिकायतों पर भी अलग-अलग निर्णय लिए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, ग्रुप संख्या 167, 176, 183, 196 और 207 के टेंडरों को समान आपत्तियों के बावजूद खोल दिया गया। विभाग ने इन पर एक्सेप्टेंस जारी कर बांड भी गठित करा दिया। वहीं, निर्माण खंड के ग्रुप 19, 23, 26, 104 और प्रांतीय खंड के ग्रुप 23 में समान परिस्थितियों के बावजूद पात्र टेंडरों को अपात्र घोषित करने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब प्रहरी ऐप ने टेंडर को पहले ही पात्र घोषित कर दिया था और 22 फरवरी 2026 को अतिरिक्त अनुभव प्रमाण पत्र स्वतः हटा दिया था (जबकि टेंडर की अंतिम तिथि 20 फरवरी थी), तो बाद में विभाग उसे अपात्र कैसे घोषित कर सकता है। ठेकेदार द्वारा शिकायत इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर राकेश वर्मा ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी है। ठेकेदार द्वारा शिकायत की गई है, जिसकी जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


