जमुई शहर के कचहरी चौक पर गुरुवार को भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान जाति आधारित जनगणना में ओबीसी कॉलम शामिल करने की जोरदार मांग की गई और भारत बंद का आह्वान भी किया गया। यह प्रदर्शन एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तीसरे चरण के तहत आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे प्रमंडल प्रभारी बनवारी पासवान ने बताया कि केंद्र सरकार ने कैबिनेट में ओबीसी जाति आधारित जनगणना का फैसला लिया था। हालांकि, आधिकारिक नोटिफिकेशन में ओबीसी जाति का कॉलम शामिल नहीं किया गया, जिसे उन्होंने पिछड़े वर्गों के साथ ‘धोखेबाजी’ करार दिया। उन्होंने राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी एवं जाति आधारित कॉलम को अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग की। 75 वर्ष बाद भी पिछड़े वर्गों को न्याय नहीं मिल पाया
कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश की आजादी के 78 वर्ष और संविधान लागू होने के 75 वर्ष बाद भी पिछड़े वर्गों को न्याय नहीं मिल पाया है। उनका तर्क था कि सही आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए जाति आधारित आंकड़े आवश्यक हैं, लेकिन ये वास्तविक आंकड़े अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इस प्रदर्शन में प्रकाश मलिक, भोपाल यादव, बालमुकुंद पासवान, महेंद्र दास, वीरेंद्र दास, रूबी कुमारी समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आगे और उग्र आंदोलन किया जाएगा। जमुई शहर के कचहरी चौक पर गुरुवार को भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान जाति आधारित जनगणना में ओबीसी कॉलम शामिल करने की जोरदार मांग की गई और भारत बंद का आह्वान भी किया गया। यह प्रदर्शन एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तीसरे चरण के तहत आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे प्रमंडल प्रभारी बनवारी पासवान ने बताया कि केंद्र सरकार ने कैबिनेट में ओबीसी जाति आधारित जनगणना का फैसला लिया था। हालांकि, आधिकारिक नोटिफिकेशन में ओबीसी जाति का कॉलम शामिल नहीं किया गया, जिसे उन्होंने पिछड़े वर्गों के साथ ‘धोखेबाजी’ करार दिया। उन्होंने राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी एवं जाति आधारित कॉलम को अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग की। 75 वर्ष बाद भी पिछड़े वर्गों को न्याय नहीं मिल पाया
कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश की आजादी के 78 वर्ष और संविधान लागू होने के 75 वर्ष बाद भी पिछड़े वर्गों को न्याय नहीं मिल पाया है। उनका तर्क था कि सही आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए जाति आधारित आंकड़े आवश्यक हैं, लेकिन ये वास्तविक आंकड़े अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इस प्रदर्शन में प्रकाश मलिक, भोपाल यादव, बालमुकुंद पासवान, महेंद्र दास, वीरेंद्र दास, रूबी कुमारी समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आगे और उग्र आंदोलन किया जाएगा।


