अक्षय तृतीया पारणा के साथ ही दान-पुण्य का भी शुभ दिन

अक्षय तृतीया पारणा के साथ ही दान-पुण्य का भी शुभ दिन

बेंगलूरु

श्वेताम्बर स्थानकवासी बावीस संप्रदाय जैन संघ ट्रस्ट के तत्वावधान में शिवाजीनगर स्थित गणेशबाग में आयोजित दो दिवसीय अक्षय तृतीया पारणा महोत्सव के दूसरे दिन डॉ. समकित मुनि ने इच्छाओं के निरोध को सबसे बड़ा तप बताया। मुनि ने कहा कि परमात्मा ने स्वयं 13 महीने का तप कर अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण पाया था। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को अपनी इच्छाओं पर अंकुश लगाने की प्रेरणा दी और कहा कि अक्षय तृतीया का दिन केवल पारणा करने का ही नहीं, बल्कि दान-पुण्य के शुभारंभ का भी महान दिन है। ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि इसी दिन से दान की परंपरा शुरू हुई थी और श्रेयांश कुमार संसार के पहले दानदाता बने थे।डॉ. समकित मुनि ने दान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस शुभ दिन किया गया दान कई गुना होकर वापस लौटता है, बशर्ते दान देने के लिए व्यक्ति का तन, मन, वचन और धन पवित्र हो। उन्होंने जीवन दर्शन समझाते हुए कहा कि अभावों के बीच भी प्रसन्नतापूर्वक जिया जा सकता है, जिसके लिए आंतरिक संतोष अनिवार्य है। जब मन किसी वस्तु को पाने की लालसा में अशांत हो, तब आत्मचिंतन करना चाहिए और अपने भीतर छिपे सुख को पहचानना चाहिए। साथ ही उन्होंने श्रमण संघ के 75वें वर्ष में प्रवेश करने और गणेशबाबा द्वारा किए गए जीवदया के कार्यों की भी सराहना की।

साध्वी रिद्धि श्री ने मरुधर केसरी के दीक्षा दिवस का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि धन और प्रतिष्ठा से मिलने वाली खुशी क्षणिक है, जबकि सच्चे गुरु की प्राप्ति ही जीवन की असली प्रसन्नता है। वहीं साध्वी सिद्धिश्री ने वर्षीतप की वैज्ञानिकता पर चर्चा करते हुए इसे एक सर्विस सेंटर की संज्ञा दी। उन्होंने बताया कि तप की प्रक्रिया से शरीर पूरी तरह डिटॉक्स हो जाता है और आत्मा कर्मों के बंधन से मुक्त होकर शुद्ध हो जाती है।

महोत्सव के दौरान कुल 73 तपस्वियों ने पारणा संपन्न किया, जिनका संघ द्वारा बहुमान किया गया। इस धार्मिक आयोजन से पूर्व चिक बाजार रोड से एक विशाल वरघोड़ा निकाला गया, जो गाजे-बाजे और जयकारों के साथ इंफेंट्री रोड स्थित गणेशबाग पहुंचा। संचालन अखिल भारतीय ओसवाल परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक नागोरी ने किया।संघ के अध्यक्ष लालचंद मांडोत, मंत्री संपतराज मांडोत और कोषाध्यक्ष सुदर्शन मांडोत सहित अन्य पदाधिकारियों ने डॉ. समकित मुनि, भवांत मुनि एवं साध्वी मंडल को वर्षीतप आराधना की अनुमोदना के रूप में आदर की चादर समर्पित की। इस अवसर पर साध्वी सत्यप्रभा, साध्वी पुनित ज्योति और अन्य साध्वी वृंद ने भी तपस्वियों की सराहना की।

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