किशनगंज पुलिस ने पुठिया प्रखंड के अर्राबाड़ी थाना क्षेत्र स्थित बालूबाड़ी गांव में हुई महिला की हत्या का मामला पांच दिनों के भीतर सुलझा लिया है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मृतका का एक रिश्तेदार मुख्य साजिशकर्ता निकला। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, मानवीय सूचना और लगातार पूछताछ के आधार पर इस जटिल हत्याकांड का खुलासा किया। यह घटना 15 अप्रैल 2026 की रात को सामने आई थी, जब बालूबाड़ी गांव के एक मकई के खेत से एक महिला का शव बरामद हुआ। मृतका की पहचान बालूबाड़ी निवासी सनवरी बेगम (पत्नी अंसार आलम) के रूप में हुई। 15 से अधिक संभावित ठिकानों पर छापेमारी की
इस संबंध में अर्राबाड़ी थाना में कांड संख्या 11/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में इसे संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या का मामला मानते हुए गंभीरता से छानबीन शुरू की। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के निर्देश पर एसडीपीओ-2 मंगलेश कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष अनुसंधान दल (SIT) का गठन किया गया। टीम ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया, आसपास के लोगों से पूछताछ की और महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए। जांच के दौरान पुलिस ने लगभग 25 लोगों से पूछताछ की और 15 से अधिक संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। इन प्रयासों से कई अहम सुराग मिले, जिससे मामले की गुत्थी सुलझने लगी। सहयोगी के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता कोई और नहीं, बल्कि मृतका का भैसुर फजले रब्बी (55) था, जो स्वयं इस मामले का वादी भी था। पुलिस के अनुसार, फजले रब्बी की मृतका के साथ पुरानी रंजिश थी। आरोपी कथित तौर पर मृतका पर घर बेचकर कहीं और जाने का दबाव बना रहा था। इसके अतिरिक्त, आरोपी की मृतका पर बुरी नजर होने की बात भी सामने आई थी, जिसे लेकर पहले एक पंचायत भी हुई थी। इसी दुश्मनी के चलते फजले रब्बी ने अपने सहयोगी मैनुल हक (50) के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। किशनगंज पुलिस ने पुठिया प्रखंड के अर्राबाड़ी थाना क्षेत्र स्थित बालूबाड़ी गांव में हुई महिला की हत्या का मामला पांच दिनों के भीतर सुलझा लिया है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मृतका का एक रिश्तेदार मुख्य साजिशकर्ता निकला। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, मानवीय सूचना और लगातार पूछताछ के आधार पर इस जटिल हत्याकांड का खुलासा किया। यह घटना 15 अप्रैल 2026 की रात को सामने आई थी, जब बालूबाड़ी गांव के एक मकई के खेत से एक महिला का शव बरामद हुआ। मृतका की पहचान बालूबाड़ी निवासी सनवरी बेगम (पत्नी अंसार आलम) के रूप में हुई। 15 से अधिक संभावित ठिकानों पर छापेमारी की
इस संबंध में अर्राबाड़ी थाना में कांड संख्या 11/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में इसे संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या का मामला मानते हुए गंभीरता से छानबीन शुरू की। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के निर्देश पर एसडीपीओ-2 मंगलेश कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष अनुसंधान दल (SIT) का गठन किया गया। टीम ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया, आसपास के लोगों से पूछताछ की और महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए। जांच के दौरान पुलिस ने लगभग 25 लोगों से पूछताछ की और 15 से अधिक संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। इन प्रयासों से कई अहम सुराग मिले, जिससे मामले की गुत्थी सुलझने लगी। सहयोगी के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता कोई और नहीं, बल्कि मृतका का भैसुर फजले रब्बी (55) था, जो स्वयं इस मामले का वादी भी था। पुलिस के अनुसार, फजले रब्बी की मृतका के साथ पुरानी रंजिश थी। आरोपी कथित तौर पर मृतका पर घर बेचकर कहीं और जाने का दबाव बना रहा था। इसके अतिरिक्त, आरोपी की मृतका पर बुरी नजर होने की बात भी सामने आई थी, जिसे लेकर पहले एक पंचायत भी हुई थी। इसी दुश्मनी के चलते फजले रब्बी ने अपने सहयोगी मैनुल हक (50) के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई।


