नगर निगम में हर मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई अब महज औपचारिकता बनकर रह गई है। जनता अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचती है, लेकिन अक्सर उन्हें सुनने के लिए जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिलते हैं। इस मंगलवार को भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां फरियादियों की भीड़ तो लगी रही, लेकिन अधिकारियों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं। मंगलवार सुबह ठीक 11 बजे जनसुनवाई शुरू हुई। शिकायतकर्ता अपनी समस्याएं लेकर सुनवाई हॉल में पहुंचने लगे, लेकिन वहां केवल अपर आयुक्त प्रदीप सिंह तोमर ही मौजूद थे। अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं। ऐसे में फरियादियों को अपनी समस्याएं सीधे अपर आयुक्त के सामने ही रखनी पड़ीं। 50 मिनट बाद कुछ अधिकारी पहुंचे अपर आयुक्त प्रदीप सिंह तोमर ने स्वयं आवेदन लिए और संबंधित प्रक्रिया की जानकारी देकर लोगों को आश्वस्त करने का प्रयास किया। करीब 50 मिनट बाद कुछ अधिकारी-कर्मचारी हॉल में पहुंचे। यह स्थिति नगर निगम द्वारा जनसुनवाई जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था को गंभीरता से न लेने का संकेत देती है। जनसुनवाई के लिए सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। इसके बावजूद अधिकारी उपस्थित नहीं रहते हैं। अपर आयुक्त प्रदीप तोमर समय पर जनसुनवाई में पहुंचे, लेकिन वहां का नजारा देखकर वे भी कुछ समय के लिए ठिठक गए।


