Pension Fraud Case: श्रम विभाग से पंजीकृत श्रमिक की मौत पर मिलने वाली बीमा राशि दिलाने के नाम पर अज्ञात बिचौलिए ने मृतक के परिजन से 70 हजार रुपए लूट लिए। बीमा राशि नही मिलने पर श्रमिक के परिजन को लूट का अहसास हुआ।
बेगूं के समीप प्रताप पूरा गांव निवासी भवानी सिह ओड की 6 नवंबर 24 को मृत्यु हो गई थी। भवानी सिह श्रम विभाग से पंजीकृत श्रमिक था। मृतक के परिजन ने सरकार की योजना के अनुसार श्रम विभाग से पंजीकृत होने पर बीमा राशि प्राप्त करने के लिए आवेदन किया। एक वर्ष हो जाने पर न तो श्रमविभाग से कोई सूचना नही आई न कोई क्लेम की राशि मिली।
जल्दी काम कराने का झांसा देकर 70 हजार ठगे
अचानक 16 अप्रैल को मृतक के पुत्र पवन कुमार ओड के एक फोन आया उसने अपने आप को मुकेश कुमार बता कर श्रम विभाग का लेबर इंस्पेक्टर बताते हुए कहा कि उनकी फाइल में कुछ कमी है उसकी पूर्ति कर दो तो आज शाम को ही आपके खाते में 3 लाख रुपए आ जाएंगे एव अगले माह से ही मृतक की पत्नी को 4500 रु मासिक पेंशन शुरू हो जाएगी। पवन दो घंटे में मांगे गए कागज की पूर्ति करने में असमर्थता व्यक्त की। 3 लाख ओर मासिक पेंशन का लालच देकर उससे बातों ही बातों में उलझा दिया । पवन को एक बार कोड भेज कर उस पर 70 हजार रुपए डलवा दिए।
जब शाम तक उनके खाते में क्लेम राशि नहीं आई तो परिजन श्रम विभाग कार्यालय पहुंचे । यहां जानकारी की तो उन्हें पता चला मुकेश कुमार नाम का व्यक्ति यहां कार्यरत नहीं है। साथ ही उनकी क्लेम फाइल पास नही हुई है। यह सुनकर पवन कुमार के पैरों तले जमीन सरक गई।
क्या है श्रमिक कार्ड योजना
श्रमिक कार्ड (ई-श्रम कार्ड या लेबर कार्ड) भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए चलाई जा रही एक प्रमुख कल्याणकारी योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार करना और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करना है।इसमें पढ़ाई के लिए 5,000 से 25,000 रुपए तक छात्रवृत्ति, विवाह सहायता के रूप में 50,000 तक, और मृत्यु/दुर्घटना होने पर दो लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदानक ी जाती है।
फ्रॉड करने वाले कैसे मिली जानकारी, सवाल जो सुलझे नहीं
मृतक भवानी सिंह के क्लेम फाइल एव मृतक के पुत्र के मोबाइल नंबर के बारे में फ्रॉड करने वाले व्यक्ति को जानकारी कैसे मिली। मृतक की पत्नी, पुत्र एव एक अन्य परिजन दूसरे दिन श्रम कार्यालय गए। शाम को ही फ्रॉड करने वाले व्यक्ति का उन्हें फोन आ गया कि तुम ऑफिस क्यों गए। उस व्यक्ति को पीड़ित के श्रम कार्यालय जाने की जानकारी कैसे मिली।
इनका कहना है…
विभाग की बहुत सी सामग्री नेट पर उपलब्ध होने का फायदा उठा कर फ्रॉड करने वालों को जानकारी मिल सकती है। विभाग में किसी भी बिचौलिए किस्म के व्यक्ति की आने के लिए मनाही है। पीड़ित को चाहिए कि पुलिस में मामला दर्ज कराए ताकि आरोपी पकड़ा जा सके एव किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा नही हो।
सुनील कुमार यादव,डिप्टी कमिश्नर श्रम विभाग चित्तौड़गढ़


