नवादा जिले के कौआकोल प्रखंड में बाल विकास परियोजना कार्यालय की सीडीपीओ अंजली कुमारी ने पोषण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित करना और बच्चों के संपूर्ण विकास, सही पोषण तथा परिवार की भूमिका के बारे में स्थानीय लोगों को जागरूक करना था। अंजली कुमारी ने अन्नप्राशन दिवस के अवसर पर विशेष रूप से बच्चों को तरल आहार से ठोस आहार की ओर ले जाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि छह महीने के बाद शिशुओं को केवल दूध के साथ-साथ पौष्टिक ठोस आहार देना शुरू करना चाहिए, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास में तेजी आ सके। कार्यक्रम में महिलाओं और पुरुषों दोनों को संबोधित करते हुए पिता की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान आकर्षित किया गया। सीडीपीओ ने जोर देकर कहा कि बच्चे का पालन-पोषण केवल मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पिता को भी इसमें सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए। सीडीपीओ अंजली कुमारी ने आधा दर्जन विभिन्न स्थानों पर ये कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। उन्होंने लोगों को नियमित पोषण, टीकाकरण, स्वच्छता और घरेलू स्तर पर संतुलित आहार तैयार करने के तरीकों के बारे में जानकारी दी। ग्रामीणों ने इस कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसी पहलें उनके गांव में कुपोषण कम करने और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद करेंगी। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय पोषण माह की भावना से प्रेरित था। अंजली कुमारी ने आंगनबाड़ी केंद्रों को और अधिक सक्रिय बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से चलाए जाएंगे ताकि हर बच्चा स्वस्थ और मजबूत बन सके। इस प्रकार की जागरूकता पहल जिले के दूरदराज के गांवों में सकारात्मक बदलाव ला रही है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्र सामुदायिक जागरूकता का मजबूत माध्यम बन रहे हैं। नवादा जिले के कौआकोल प्रखंड में बाल विकास परियोजना कार्यालय की सीडीपीओ अंजली कुमारी ने पोषण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित करना और बच्चों के संपूर्ण विकास, सही पोषण तथा परिवार की भूमिका के बारे में स्थानीय लोगों को जागरूक करना था। अंजली कुमारी ने अन्नप्राशन दिवस के अवसर पर विशेष रूप से बच्चों को तरल आहार से ठोस आहार की ओर ले जाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि छह महीने के बाद शिशुओं को केवल दूध के साथ-साथ पौष्टिक ठोस आहार देना शुरू करना चाहिए, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास में तेजी आ सके। कार्यक्रम में महिलाओं और पुरुषों दोनों को संबोधित करते हुए पिता की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान आकर्षित किया गया। सीडीपीओ ने जोर देकर कहा कि बच्चे का पालन-पोषण केवल मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पिता को भी इसमें सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए। सीडीपीओ अंजली कुमारी ने आधा दर्जन विभिन्न स्थानों पर ये कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। उन्होंने लोगों को नियमित पोषण, टीकाकरण, स्वच्छता और घरेलू स्तर पर संतुलित आहार तैयार करने के तरीकों के बारे में जानकारी दी। ग्रामीणों ने इस कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसी पहलें उनके गांव में कुपोषण कम करने और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद करेंगी। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय पोषण माह की भावना से प्रेरित था। अंजली कुमारी ने आंगनबाड़ी केंद्रों को और अधिक सक्रिय बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से चलाए जाएंगे ताकि हर बच्चा स्वस्थ और मजबूत बन सके। इस प्रकार की जागरूकता पहल जिले के दूरदराज के गांवों में सकारात्मक बदलाव ला रही है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्र सामुदायिक जागरूकता का मजबूत माध्यम बन रहे हैं।


