पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा पर जमकर हमला बोला है। इस दौरान पप्पू यादव ने हिमंता बिस्व की तुलना चिंपांजी और कुत्ते से कर दी। उन्होंने कहा, बड़े नेताओं के खिलाफ बोलने वालों की स्थिति सड़क पर भौंकते कुत्तों जैसी होती है। हालांकि बड़े नेता हाथी की तरह अपने रास्ते पर चलते रहते हैं। पप्पू यादव इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने असम के मुख्यमंत्री को चरित्रहीन और उससे बड़ा बाचल तक कह डाला। हिमंता बिस्व को आड़े हाथों लेते हुए पूर्णिया सांसद ने कहा वे मानव नहीं वनमानुष हैं। उनका नाम चिंपांजी होना चाहिए। सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का किया समर्थन पप्पू यादव ने बीजेपी, महिला आरक्षण बिल और नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर खुलकर टिप्पणी की है। पप्पू यादव ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एक पिछड़े वर्ग के नेता का सीएम बनना बड़ी बात है, लेकिन बीजेपी के अंदर ही कुछ लोग इसे पचा नहीं पा रहे हैं और लगातार अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी के कई नेताओं की शैक्षणिक योग्यता और आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड सवालों के घेरे में है, फिर भी सिर्फ एक व्यक्ति को निशाना बनाया जा रहा है। बीजेपी ने सम्राट को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधते हुए पप्पू यादव ने उनके खिलाफ पुराने मामलों का जिक्र किया और बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। पप्पू यादव ने दावा किया कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद उन्हें पार्टी के शीर्ष नेताओं से वह तवज्जो नहीं मिली, जिसकी उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि न तो कोई बड़ा जश्न हुआ और न ही उन्हें तुरंत दिल्ली बुलाया गया। जिससे यह संकेत मिलता है कि बीजेपी के भीतर उन्हें पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है। ‘महिला आरक्षण लागू करने से पहले जातिगत जनगणना कराई जाए’ महिला आरक्षण बिल को लेकर पप्पू यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस अहम मुद्दे पर बिना व्यापक चर्चा, विशेषज्ञों की राय और राज्यों से परामर्श के फैसला लिया। उन्होंने कहा कि 2014 और 2019 में पूर्ण बहुमत होने के बावजूद सरकार ने इस बिल को पास नहीं किया, लेकिन अब राजनीतिक लाभ के लिए इसे लाया जा रहा है। पूर्णिया सांसद ने यह भी मांग की कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले जातिगत जनगणना कराई जाए, ताकि सभी वर्गों को न्याय मिल सके। उन्होंने दावा किया कि देश में यौन शोषण के मामलों में नेताओं की बड़ी भूमिका है और कई सांसदों पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि 90% महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बेड से शुरू होता है। पप्पू यादव ने कहा कि वे महिला आरक्षण के सिद्धांत के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने साफ कहा कि ओबीसी, ईबीसी, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय इस तरह की नीतियों को लेकर सरकार को कभी माफ नहीं करेगा। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा पर जमकर हमला बोला है। इस दौरान पप्पू यादव ने हिमंता बिस्व की तुलना चिंपांजी और कुत्ते से कर दी। उन्होंने कहा, बड़े नेताओं के खिलाफ बोलने वालों की स्थिति सड़क पर भौंकते कुत्तों जैसी होती है। हालांकि बड़े नेता हाथी की तरह अपने रास्ते पर चलते रहते हैं। पप्पू यादव इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने असम के मुख्यमंत्री को चरित्रहीन और उससे बड़ा बाचल तक कह डाला। हिमंता बिस्व को आड़े हाथों लेते हुए पूर्णिया सांसद ने कहा वे मानव नहीं वनमानुष हैं। उनका नाम चिंपांजी होना चाहिए। सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का किया समर्थन पप्पू यादव ने बीजेपी, महिला आरक्षण बिल और नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर खुलकर टिप्पणी की है। पप्पू यादव ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एक पिछड़े वर्ग के नेता का सीएम बनना बड़ी बात है, लेकिन बीजेपी के अंदर ही कुछ लोग इसे पचा नहीं पा रहे हैं और लगातार अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी के कई नेताओं की शैक्षणिक योग्यता और आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड सवालों के घेरे में है, फिर भी सिर्फ एक व्यक्ति को निशाना बनाया जा रहा है। बीजेपी ने सम्राट को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधते हुए पप्पू यादव ने उनके खिलाफ पुराने मामलों का जिक्र किया और बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। पप्पू यादव ने दावा किया कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद उन्हें पार्टी के शीर्ष नेताओं से वह तवज्जो नहीं मिली, जिसकी उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि न तो कोई बड़ा जश्न हुआ और न ही उन्हें तुरंत दिल्ली बुलाया गया। जिससे यह संकेत मिलता है कि बीजेपी के भीतर उन्हें पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है। ‘महिला आरक्षण लागू करने से पहले जातिगत जनगणना कराई जाए’ महिला आरक्षण बिल को लेकर पप्पू यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस अहम मुद्दे पर बिना व्यापक चर्चा, विशेषज्ञों की राय और राज्यों से परामर्श के फैसला लिया। उन्होंने कहा कि 2014 और 2019 में पूर्ण बहुमत होने के बावजूद सरकार ने इस बिल को पास नहीं किया, लेकिन अब राजनीतिक लाभ के लिए इसे लाया जा रहा है। पूर्णिया सांसद ने यह भी मांग की कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले जातिगत जनगणना कराई जाए, ताकि सभी वर्गों को न्याय मिल सके। उन्होंने दावा किया कि देश में यौन शोषण के मामलों में नेताओं की बड़ी भूमिका है और कई सांसदों पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि 90% महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बेड से शुरू होता है। पप्पू यादव ने कहा कि वे महिला आरक्षण के सिद्धांत के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने साफ कहा कि ओबीसी, ईबीसी, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय इस तरह की नीतियों को लेकर सरकार को कभी माफ नहीं करेगा।


