Tamil Nadu Assembly Elections 2026: देश के दक्षिणी सिरे कन्याकुमारी में इस बार चुनावी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। अब तक 6 में से 4 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस-DMK और 2 पर BJP-AIADMK का कब्जा रहा, लेकिन इस बार के चुनाव में अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) की एंट्री ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। सवाल यही है- क्या TVK सिर्फ वोट-कटर बनेगी या गेम-चेंजर साबित होगी? TVK ने युवाओं, महिलाओं और मछुआरा समुदाय में बढ़ती पकड़ ने पारंपरिक वोट बैंक को अस्थिर किया है, जिससे दोनों बड़े गठबंधनों की रणनीति पर सीधा असर पड़ रहा है।
TVK का उभार- भीड़ से वोट तक की चुनौती
TVK ने ‘व्हिसल’ प्रतीक और विजय की लोकप्रियता के सहारे तेज एंट्री की है। रोड शो में उमड़ी भीड़ और युवाओं-महिलाओं का उत्साह इसकी ताकत है। 46% ईसाई आबादी वाले जिले में ‘जोसेफ विजय’ की पहचान के जरिए कनेक्ट बनाने की कोशिश दिख रही है, खासकर मीनावर (मछुआरा) समुदाय में उनकी लोकप्रियता साफ झलक रही है। कोलाचेल जैसे इलाकों में असर साफ है, लेकिन असली सवाल यही है क्या यह समर्थन वोट में बदलेगा या सिर्फ फैनफेयर तक सीमित रहेगा?
वोट स्प्लिट बड़ा फैक्टर, अपनी साख बचाने में जुटी कांग्रेस और BJP
कांग्रेस-DMK के नेता 4 सीटों के मौजूदा बढ़त को बचाने में जुटे हैं। वहीं BJP-AIADMK, 2 सीटों को बचाए रखने की कोशिश में है। कांग्रेस-DMK को उम्मीद है कि AIADMK वोट उनके पक्ष में शिफ्ट होंगे, जबकि BJP मछुआरों के लिए केंद्र की योजनाओं पर फोकस कर रही है। सबसे बड़ा फैक्टर वोट स्प्लिट है। अगर ईसाई और मछुआरा वोट TVK की ओर खिसके तो इसका अप्रत्यक्ष फायदा BJP को मिल सकता है। फिलहाल, सभी को 4 मई का इंतजार है। 4 मई को मतगणना के दिन तय होगा कि कन्याकुमारी में थलापति की एंट्री सिर्फ हलचल है या सत्ता के समीकरण बदलने वाली लहर।


