मध्य प्रदेश में पिछले साल ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के नाम पर शुरू की गई दुकान एवं स्थापना पंजीयन की ऑटो-अप्रूवल व्यवस्था अब जालसाजों के लिए वरदान साबित होने लगी है। एमपी के श्रम विभाग द्वारा की गई औचक जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें सामने आया है कि कई लोगों ने फर्जी और अधूरे दस्तावेजों के दम पर आसानी से पंजीयन हासिल कर लिए हैं। इस खुलासे के बाद से विभाग में हड़कंप मच गया है। ऑटो-अप्रूवल की व्यवस्था का उठाया फायदा
श्रम आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, बीते वर्ष 12 सितंबर 2025 से दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 1958 के तहत पंजीकरण प्रक्रिया को पूर्णतः स्वचालित (ऑटो-अप्रूवल) कर दिया गया था, ताकि आवेदकों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े। हालांकि, इस व्यवस्था का लाभ उठाकर कई आवेदकों ने सिस्टम को चकमा दे दिया। विभाग की रैण्डम जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं। जिनमें आवेदन अधूरे थे, हस्ताक्षरित नहीं थे या दुकान के फोटो ही नहीं थे। चौंकाने वाली बात यह है कि कई आवेदकों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए एडिटेड फोटो लगाए और गलत पतों का उपयोग किया। श्रमायुक्त ने बदली व्यवस्था
श्रम आयुक्त तन्वी हुड्डा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के सभी सहायक श्रमायुक्तों, श्रम पदाधिकारियों और निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विभाग ने आदेश दिया है कि जिला स्तर पर जारी हुए कुल पंजीयनों में से कम से कम 10 प्रतिशत प्रमाणपत्रों की बारीकी से रैण्डम जांच की जाए। यदि जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो ऐसे पंजीयन तत्काल निरस्त किए जाएंगे। इसके अलावा, जिन लोगों ने धुंधले या अपठनीय(पढ़ने योग्य नहीं) दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन प्राप्त किए हैं, उन्हें ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया जाएगा। पंजीयन निरस्त होने की सूचना संचालक को एसएमएस से मिलेगी श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई दुकान या स्थापना बंद पाई जाती है या अस्तित्व में ही नहीं है, तो पंचनामा बनाकर संबंधित पंजीयन को निरस्त करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस पूरी कार्रवाई को पारदर्शी रखने के लिए मुख्यालय स्तर से एक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे पंजीयन निरस्त होने की सूचना आवेदक को सीधे एसएमएस के जरिए मिल सकेगी, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें। एमपी ऑनलाइन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह पंजीकरण निरस्तीकरण की सुविधा संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराए। विभाग के इस सख्त रुख से उन लोगों में खलबली मच गई है, जिन्होंने अवैध तरीके से पंजीयन हासिल कर सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया है।


