पूर्णिया में युवक ने गुस्से में पी लिया था एसिड:GMCH के डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन, गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी सर्जरी से दिया नया जीवन

पूर्णिया में युवक ने गुस्से में पी लिया था एसिड:GMCH के डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन, गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी सर्जरी से दिया नया जीवन

पूर्णिया GMCH के डॉक्टरों ने 45 साल के एक शख्स को मौत के मुंह से निकालकर नई जिंदगी दी है। डेढ़ महीने पहले गुस्से में एसिड पी लेने से उसका आमाशय बुरी तरह जल गया था। हालत लगातार बिगड़ रही थी। खाना तो दूर, पानी भी शरीर में टिक नहीं रहा था। ऐसे मुश्किल वक्त में डॉक्टरों ने गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी जैसी जटिल सर्जरी कर मरीज की जान बचा ली। कटिहार के कोढ़ा के रहने वाले दिलीप महतो ने करीब डेढ़ महीने पहले एसिड पी लिया था। इस एक गलती ने उनकी जिंदगी को खतरे में डाल दिया। पेट का निचला हिस्सा पूरी तरह खराब हो गया। जो भी खाते-पीते, तुरंत उल्टी हो जाती। शरीर कमजोर होता गया। करीब 10 किलो वजन कम हो गया। हालत इतनी बिगड़ गई कि जान पर बन आई। परिजन उन्हें लेकर पूर्णिया GMCH पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए जांच शुरू की। एंडोस्कोपी में साफ हो गया कि पेट का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है। खाना आगे जा ही नहीं पा रहा था। यह स्थिति सीधे-सीधे जानलेवा थी। डॉक्टरों ने आज गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी सर्जरी की डॉक्टरों ने तुरंत बड़ा फैसला लिया। ऑपरेशन ही आखिरी रास्ता था। आज गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी सर्जरी की गई। ये बेहद जटिल और जोखिम भरा ऑपरेशन माना जाता है। लेकिन सर्जरी विभाग की टीम ने इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस ऑपरेशन का नेतृत्व विभागाध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर कुमार ने किया। उनके साथ डॉ. अमर और डॉ. अपराजिता ने अहम भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. विकास कुमार ने संभाली। ऑपरेशन के दौरान अधीक्षक डॉ. संजय कुमार खुद मौजूद रहे और पूरी टीम का मनोबल बढ़ाते रहे। साथ ही डॉक्टरों और स्टाफ की बड़ी टीम ने मिलकर इस चुनौती को सफलता में बदल दिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि जिस इलाज के लिए निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च होते हैं, वही सुविधा यहां पूरी तरह मुफ्त में दी गई। गरीब मरीज के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की टीम ने कहा कि ये इस ऑपरेशन ने ये साबित कर दिया है कि अब पूर्णिया में भी गंभीर और जटिल बीमारियों का इलाज संभव है। GMCH की ये उपलब्धि न सिर्फ अस्पताल का भरोसा बढ़ा रही है, बल्कि पूरे इलाके के लोगों को यह संदेश दे रही है कि बेहतर इलाज के लिए अब दूर जाने की जरूरत नहीं है। पूर्णिया GMCH के डॉक्टरों ने 45 साल के एक शख्स को मौत के मुंह से निकालकर नई जिंदगी दी है। डेढ़ महीने पहले गुस्से में एसिड पी लेने से उसका आमाशय बुरी तरह जल गया था। हालत लगातार बिगड़ रही थी। खाना तो दूर, पानी भी शरीर में टिक नहीं रहा था। ऐसे मुश्किल वक्त में डॉक्टरों ने गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी जैसी जटिल सर्जरी कर मरीज की जान बचा ली। कटिहार के कोढ़ा के रहने वाले दिलीप महतो ने करीब डेढ़ महीने पहले एसिड पी लिया था। इस एक गलती ने उनकी जिंदगी को खतरे में डाल दिया। पेट का निचला हिस्सा पूरी तरह खराब हो गया। जो भी खाते-पीते, तुरंत उल्टी हो जाती। शरीर कमजोर होता गया। करीब 10 किलो वजन कम हो गया। हालत इतनी बिगड़ गई कि जान पर बन आई। परिजन उन्हें लेकर पूर्णिया GMCH पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए जांच शुरू की। एंडोस्कोपी में साफ हो गया कि पेट का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है। खाना आगे जा ही नहीं पा रहा था। यह स्थिति सीधे-सीधे जानलेवा थी। डॉक्टरों ने आज गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी सर्जरी की डॉक्टरों ने तुरंत बड़ा फैसला लिया। ऑपरेशन ही आखिरी रास्ता था। आज गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी सर्जरी की गई। ये बेहद जटिल और जोखिम भरा ऑपरेशन माना जाता है। लेकिन सर्जरी विभाग की टीम ने इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस ऑपरेशन का नेतृत्व विभागाध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर कुमार ने किया। उनके साथ डॉ. अमर और डॉ. अपराजिता ने अहम भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. विकास कुमार ने संभाली। ऑपरेशन के दौरान अधीक्षक डॉ. संजय कुमार खुद मौजूद रहे और पूरी टीम का मनोबल बढ़ाते रहे। साथ ही डॉक्टरों और स्टाफ की बड़ी टीम ने मिलकर इस चुनौती को सफलता में बदल दिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि जिस इलाज के लिए निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च होते हैं, वही सुविधा यहां पूरी तरह मुफ्त में दी गई। गरीब मरीज के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की टीम ने कहा कि ये इस ऑपरेशन ने ये साबित कर दिया है कि अब पूर्णिया में भी गंभीर और जटिल बीमारियों का इलाज संभव है। GMCH की ये उपलब्धि न सिर्फ अस्पताल का भरोसा बढ़ा रही है, बल्कि पूरे इलाके के लोगों को यह संदेश दे रही है कि बेहतर इलाज के लिए अब दूर जाने की जरूरत नहीं है।  

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