शिवहर में गेहूं फसल कटनी प्रयोग का निरीक्षण:12.870 किलो वजन दर्ज, प्रति हेक्टेयर 25.74 क्विंटल उपज आंकी गई

शिवहर में गेहूं फसल कटनी प्रयोग का निरीक्षण:12.870 किलो वजन दर्ज, प्रति हेक्टेयर 25.74 क्विंटल उपज आंकी गई

उप विकास आयुक्त (डीडीसी) बृजेश कुमार ने शिवहर जिले में गेहूं फसल कटनी प्रयोग का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत कृषि वर्ष 2025-26 के लिए पंचायत स्तर पर चल रहे कार्यों का हिस्सा था। निरीक्षण पुरनहिया अंचल के कोल्हुआ ठिकहां पंचायत के ग्राम सोनौल सुल्तान में कृषक मिथिलेश कुमार सिंह के खेत में किया गया। इस दौरान सुश्री अन्नी कुमारी प्राथमिक प्रयोगकर्ता के रूप में उपस्थित थीं। किसान सलाहकार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे
इस अवसर पर जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी (पुरनहिया), सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी और किसान सलाहकार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। फसल कटनी प्रयोग के बाद 10×5 मीटर के क्षेत्र में गेहूं का कुल वजन 12.870 किलोग्राम दर्ज किया गया। इसके आधार पर प्रति हेक्टेयर उपज दर 25.74 क्विंटल आंकी गई है। वास्तविक उपज दर का निर्धारण किया जाता
अधिकारियों ने बताया कि फसल कटनी प्रयोग के माध्यम से ही वास्तविक उपज दर का निर्धारण किया जाता है। ये आंकड़े राज्य की खाद्य नीति निर्धारण और आर्थिक आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उप विकास आयुक्त (डीडीसी) बृजेश कुमार ने शिवहर जिले में गेहूं फसल कटनी प्रयोग का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत कृषि वर्ष 2025-26 के लिए पंचायत स्तर पर चल रहे कार्यों का हिस्सा था। निरीक्षण पुरनहिया अंचल के कोल्हुआ ठिकहां पंचायत के ग्राम सोनौल सुल्तान में कृषक मिथिलेश कुमार सिंह के खेत में किया गया। इस दौरान सुश्री अन्नी कुमारी प्राथमिक प्रयोगकर्ता के रूप में उपस्थित थीं। किसान सलाहकार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे
इस अवसर पर जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी (पुरनहिया), सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी और किसान सलाहकार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। फसल कटनी प्रयोग के बाद 10×5 मीटर के क्षेत्र में गेहूं का कुल वजन 12.870 किलोग्राम दर्ज किया गया। इसके आधार पर प्रति हेक्टेयर उपज दर 25.74 क्विंटल आंकी गई है। वास्तविक उपज दर का निर्धारण किया जाता
अधिकारियों ने बताया कि फसल कटनी प्रयोग के माध्यम से ही वास्तविक उपज दर का निर्धारण किया जाता है। ये आंकड़े राज्य की खाद्य नीति निर्धारण और आर्थिक आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

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