सवाई माधोपुर। मध्यप्रदेश के कूनों नेशनल पार्क से एक बार फिर अफ्रीकी चीता बुधवार रात कोटा के रास्ते चम्बल नदी पार कर रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की सीमा में पहुंच गया। यह चीता, जिसे केपी-2 नाम दिया गया है, गुरुवार सुबह सवाईमाधोपुर जिले के पालीघाट और फलौदी रेंज क्षेत्र में देखा गया। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह अजीतपुरा गांव की सड़कों पर चीता घूमता दिखाई दिया, इसके बाद वह खेतों की ओर चला गया।
सूचना मिलते ही पालीघाट रेंजर किशनकुमार सांखला और फलौदी रेंजर विजय मीणा सहित वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ट्रैकिंग शुरू की। बाद में कूनों नेशनल पार्क की टीम भी रणथम्भौर पहुंच गई और चीते की लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास जारी है। वन अधिकारियों के अनुसार बुधवार रात चीता चम्बल नदी पार कर कोटा जिले की सीमा में आया और फिर रात के अंधेरे में सवाईमाधोपुर जिले की सीमा में प्रवेश कर गया।
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गौरतलब है कि 27 मार्च को कोटा जिले के पीपलदा और समेल गांव में इसी चीते को ट्रैंकुलाइज कर कूनों की टीम वापस ले गई थी। अब यह रणथम्भौर पहुंच गया है।
अजीतपुरा गांव में दिखा केपी-2
गुरुवार सुबह अजीतपुरा और दोपहर में सवाईगंज गांव में भी इसके मूवमेंट की सूचना मिली। पालीघाट रेंजर किशनकुमार सांखला ने बताया कि ग्रामीणों ने चीते को देखने की जानकारी दी थी। इसके बाद पालीघाट और फलौदी रेंज की टीमों ने मौके पर पहुंचकर ट्रैकिंग शुरू की। रणथम्भौर की टीम ने इस संबंध में कूनों नेशनल पार्क के अधिकारियों को सूचित किया। कूनों से एक विशेष टीम भी रणथम्भौर पहुंच चुकी है।
मार्च माह में आठ दिन रूका था कोटा
वनाधिकारियों ने बताया कि यह वही चीता है जो 19 मार्च को कोटा जिले की सीमा में आया था। 27 मार्च को इसे ट्रैंकुलाइज कर कूनों ले जाया गया था। अब यह दोबारा यहां पहुंच गया है। उधर, केपी-2 के अलावा केपी-3 का मूवमेंट भी बारां जिले में लगातार देखा जा रहा है। दो दिन पहले उसकी लोकेशन अटरू और छबड़ा क्षेत्र में ट्रेस की गई थी।
मादा चीता ज्वाला भी आई थी बालेर
करीब आठ माह पहले कूनों की मादा चीता ज्वाला भी 130 किलोमीटर दूर सवाईमाधोपुर जिले के बालेर रेंज क्षेत्र में पहुंच गई थी। उस समय उसने एक बाड़े में बकरी का शिकार किया था। बाद में वन विभाग की टीम उसे ट्रैंकुलाइज कर वापस कूनों ले गई थी।
इनका कहना है-
‘बुधवार रात चीता केपी-2 चम्बल पार कर रणथम्भौर पहुंचा। सुबह अजीतपुरा गांव के लोगों ने सड़क पर उसे घूमते देखा। इसके बाद वह लहसोड़ा क्षेत्र के सवाईगंज इलाके में चला गया। वन विभाग की टीम लगातार उसकी ट्रैकिंग कर रही है, लेकिन अभी उसकी सटीक लोकेशन नहीं मिल पाई है।’ -विजय कुमार सांखला, क्षेत्रीय वनाधिकारी पालीघाट।


