Trump Letter to Xi Jinping: अमेरिका, चीन और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नया कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सीधे पत्र लिखकर ईरान को कथित तौर पर हथियार सप्लाई करने को लेकर सवाल उठाया था। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें रिपोर्ट्स के जरिए जानकारी मिली थी कि चीन, ईरान को हथियार मुहैया करा रहा है। इस पर उन्होंने जिनपिंग को पत्र लिखते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि अगर ऐसा हो रहा है तो इसे तुरंत रोका जाए।
ट्रंप का खुलासा, जिनपिंग को भेजा था संदेश
ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने अपने पत्र में चीन को साफ संदेश दिया था कि ईरान को हथियार सप्लाई करना क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा, ”मैंने सुना है कि आप ईरान को हथियार दे रहे हैं… और मैंने उन्हें लिखा कि ऐसा न करें।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच सीजफायर के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
चीन ने जवाब में क्या कहा?
ट्रंप ने यह भी बताया कि चीन की ओर से उन्हें जवाब मिला, जिसमें साफ कहा गया कि बीजिंग ईरान को किसी तरह के हथियार नहीं दे रहा है। चीन ने अपने रुख में कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों और अपने घरेलू कानूनों के तहत हथियारों के निर्यात पर सख्त नियंत्रण रखता है और किसी भी तरह की गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई में शामिल नहीं है।
US-चीन-ईरान समीकरण में नई हलचल
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ अमेरिका ईरान के साथ समझौते और युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ इस तरह का संवाद वैश्विक राजनीति के नए समीकरणों की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर चीन वास्तव में ईरान के साथ किसी तरह का सैन्य सहयोग करता है, तो यह अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल
हालांकि, चीन के इनकार के बाद फिलहाल यह मुद्दा कूटनीतिक स्तर पर ही बना हुआ है, लेकिन इससे यह जरूर साफ हो गया है कि अमेरिका इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और किसी भी संभावित सैन्य सहयोग को लेकर सतर्क है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत किसी ठोस समझौते तक पहुंचती है या फिर इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप वैश्विक तनाव को और बढ़ाते हैं।


