Smart Toothpaste : वैज्ञानिक तैयार कर रहे स्मार्ट टूथपेस्ट, बदबूदार बीमारी पायरिया को कर सकती है खत्म!

Smart Toothpaste : वैज्ञानिक तैयार कर रहे स्मार्ट टूथपेस्ट, बदबूदार बीमारी पायरिया को कर सकती है खत्म!

Smart Toothpaste For Gum Disease Treatment: आपने ये बात तो सुनी होगी कि मुंह की सेहत चमकते दांतों तक नहीं है, बल्कि इसका संबंध हमारे मसूड़ों से होता है। मसूड़ों की बीमारी के लिए हम जिन एंटी-बैक्टीरियल उत्पादों का उपयोग करते हैं, वे अच्छे और बुरे दोनों तरह के बैक्टीरिया को खत्म कर देते हैं। Fraunhofer Institute for Cell Therapy and Immunology के एक शोध ने मसूड़ों की गंभीर बीमारी पीरियोडोंटाइटिस/ पायरिया (Smart Toothpaste for Pyorrhea) के इलाज की नई राह दिखाई है। आइए जानते हैं कि क्या है ये नई तकनीक।

क्या है यह नई तकनीक?

माउथवॉश या टूथपेस्ट एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटी-बायोटिक की तरह काम करते हैं, जो मुंह के जरूरी सुरक्षा तंत्र को भी नष्ट कर देते हैं। नई खोज में वैज्ञानिकों ने प्रिसिजन मेडिसिन का उपयोग किया है। इसमें ऐसे मॉलिक्यूल्स (Molecules) है जो केवल उन हानिकारक एंजाइम्स और बैक्टीरिया को निशाना बनाते हैं जो मसूड़ों में सूजन और ऊतकों (Tissues) के नुकसान के लिए जिम्मेदार होते हैं।

पीरियोडोंटाइटिस (Periodontitis) क्या है?

यह मसूड़ों की बीमारी है जो दांतों के चारों ओर जमा होने वाले बैक्टीरिया से होती है। जब प्लाक सख्त होकर टार्टर बन जाता है, तो यह मसूड़ों और दांतों के बीच जगह (पॉकेट्स) बना देता है, जहां इन्फेक्शन बढ़ता चला जाता है।

पीरियोडोंटाइटिस के कारण क्या होते हैं?

  • प्लाक का जमना।
  • धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करना।
  • मधुमेह (Diabetes), मोटापा और विटामिन सी की कमी।।
  • हार्मोनल बदलाव होना।

प्रमुख लक्षण (Symptoms)

  • ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आना ।
  • मसूड़ों का रंग लाल या बैंगनी हो जाना।
  • मसूड़ों का दांतों से अलग हट जाना।
  • लगातार बदबू आना।
  • दांतों के बीच खाली जगह बनना।
  • चबाते समय दर्द होना।

पीरियोडोंटाइटिस से बचाव के उपाय (Prevention)

  • कम से कम दो मिनट तक सही तकनीक से ब्रश करें।
  • दांतों के बीच फंसी गंदगी निकाले।
  • हर 6 महीने में डेंटिस्ट से दांतों की सफाई (Scaling) करवाएं।
  • विटामिन युक्त आहार लें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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