Automobile sales: सात साल का इंतजार खत्म हुआ। FY26 में भारत के ऑटो सेक्टर ने वह कर दिखाया जो 2018-19 के बाद नहीं हुआ था। गाड़ी खरीदने का शौक भारतीयों को हमेशा रहा है। पर इस बार के आंकड़े देखकर खुद ऑटो इंडस्ट्री के लोग हैरान हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में देश में कुल 2 करोड़ 82 लाख 65 हजार 519 गाड़ियां बिकीं। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। पिछले साल की तुलना में 10.4 फीसदी की बढ़त। खास बात यह है कि सभी सेगमेंट यानी कार, ट्रक, दोपहिया और तिपहिया, सभी ने एक साथ रिकॉर्ड बनाया। SIAM यानी सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
GST 2.0 और सस्ते कर्ज से मिला फायदा
SIAM के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने कहा कि इस रिकॉर्ड के पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहली, GST 2.0 सुधारों से बाजार में सकारात्मक माहौल बना। दूसरी, साल भर में कई बार रेपो रेट में कटौती हुई जिससे गाड़ियों पर लोन सस्ता हुआ और लोगों की जेब में थोड़ी राहत आई। उन्होंने कहा कि साल की शुरुआत थोड़ी धीमी रही थी, लेकिन साल का अंत जोरदार रहा। सात साल में पहली बार हर कैटेगरी ने एक साथ सर्वकालिक ऊंचाई को छुआ।
सेगमेंटवार आंकड़े: कौन कितना आगे?
दोपहिया: यह सबसे बड़ा सेगमेंट है। FY26 में 2 करोड़ 17 लाख से ज्यादा दोपहिया बिके जो पिछले साल के मुकाबले 10.7 फीसदी ज्यादा हैं। स्कूटर की बिक्री ने सबको चौंकाया। 18.5 फीसदी की छलांग लगाई और 81 लाख से ज्यादा स्कूटर बिके। मोटरसाइकिल 6.6 फीसदी बढ़कर 1 करोड़ 30 लाख पार कर गई।
पैसेंजर व्हीकल: कारों और SUV की बिक्री 43 लाख से बढ़कर 46.43 लाख हो गई। यह 7.9 फीसदी की वृद्धि है।
कमर्शियल व्हीकल: ट्रक और बसें भी पीछे नहीं रहीं। 9.58 लाख से बढ़कर 10.79 लाख यूनिट। 12.6 फीसदी की बढ़त।
तिपहिया: 7.41 लाख से बढ़कर 8.36 लाख। 12.8 फीसदी की बढ़त।
निर्यात में भी जोरदार उछाल
FY26 में भारत ने 66.47 लाख गाड़ियां निर्यात कीं, जो FY25 के 53.62 लाख से 24 फीसदी ज्यादा है। यह भी एक शानदार उपलब्धि है। हालांकि, शैलेश चंद्रा ने कहा कि मेक्सिको में आयात शुल्क बढ़ने और मध्य पूर्व में जंग के माहौल की वजह से उन बाजारों में दिक्कत आ सकती है। ये दोनों मिलकर भारत के पैसेंजर व्हीकल निर्यात का 20 से 22 फीसदी हिस्सा बनाते हैं। पर बाकी दुनिया में भारतीय गाड़ियों की मांग बढ़ रही है। रुपए की कमजोरी ने भी निर्यात को हवा दी है।
ईरान जंग के चलते आगे की राह आसान नहीं
सब कुछ अच्छा है, लेकिन एक चिंता है जो पीछा नहीं छोड़ रही। पश्चिम एशिया में जंग का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। महंगा तेल माल ढुलाई महंगा करता है, कच्चा माल महंगा होता है और गाड़ियों की कीमतें बढ़ने का खतरा रहता है। इससे आम खरीदार का बजट बिगड़ सकता है। SIAM ने साफ कहा है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचा तो उत्पादन, सप्लाई चेन और मांग तीनों पर असर पड़ सकता है।


