अमेरिका (United States of America) और ईरान (Iran) के बीच पाकिस्तान (Pakistan) के इस्लामाबाद (Islamabad) में वार्ता का पहला दौर विफल रहने के बाद तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आदेश पर उनकी नेवी ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को घेरना शुरू कर दिया है। इसके जवाब में ईरानी सेना भी मुस्तैद है। दोनों पक्षों के बीच वार्ता विफल होने का प्रमुख कारण परमाणु मुद्दे पर सहमति न बनना रहा। अब इस मामले पर एक नई बात सामने आई है।
परमाणु प्रोग्राम के निलंबन पर नहीं बनी सहमति
ईरान ने अपने परमाणु प्रोग्राम को 5 साल के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि अमेरिक चाहता है कि ईरान अपने परमाणु प्रोग्राम को 20 साल के लिए निलंबित करें। इसके साथ ही अन्य कई प्रतिबंध भी जुड़े हैं, जैसे ईरान के पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम स्टॉक को विदेश भेजना और परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को पूरी तरह रोकना।
क्या है अमेरिका की सोच?
अमेरिका का मानना है कि यूरेनियम संवर्धन ईरान को परमाणु बम बनाने का रास्ता प्रदान करता है। अगर ईरान इसे छोड़ने के लिए तैयार होता है, तो बदले में अमेरिका भी ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने के लिए तैयार है।
ईरान नहीं है तैयार
ईरान ने साफ कर दिया है कि वो 20 साल के लिए अपने परमाणु प्रोग्राम को निलंबित नहीं करेगा। ईरान ने पहले कई मौकों पर कहा है कि वो परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता, बल्कि सिर्फ परमाणु एनर्जी विकसित करना चाहता है, जिसका इस्तेमाल देश की जनता के लिए किया जा सके। हालांकि अमेरिका और इज़रायल इसके पक्ष में नहीं हैं।



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