औरंगाबाद प्रखंड अंतर्गत अदरी नदी के तट पर स्थित बड़वां गांव इन दिनों पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है। यहां जनकल्याण और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर मां सत्यचंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। आज यज्ञ का तीसरा दिन अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखी गई।इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत 10 अप्रैल को भव्य जल शोभा यात्रा के साथ हुई थी। गांव की महिलाओं और युवतियों ने कलश लेकर पूरे क्षेत्र में भ्रमण किया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत यज्ञ का शुभारंभ किया गया। तब से लेकर प्रतिदिन पूजा-पाठ, हवन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं, जिनमें श्रद्धालु बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने बताया कि 11 अप्रैल यानी शनिवार को पंचांग पूजन, मंडप प्रवेश, वैदिक पूजन व अग्नि मंथन के साथ पाठ प्रारंभ किया गया। रविवार को यज्ञ में आवाहित देवी देवताओं का पूजन व हवन के बाद पाठ प्रारंभ होगा। इसी प्रकार सोमवार व मंगलवार को भी पूजा हवन और पाठ होगा। बुधवार को विशाल भंडारा के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति और संतों की विदाई की जाएगी। प्रवचन सुनने के लिए पहुंच रहे आसपास के कई गांव के श्रद्धालु आयोजन समिति के अनुसार, प्रतिदिन संध्या 7 बजे से प्रयागराज से पधारे कथावाचक अनुराग शास्त्री की ओर से कथा वाचन किया जा रहा है, जबकि रात के 9 बजे से सावित्री शास्त्री की ओर से प्रवचन दिया जा रहा है। कथा और प्रवचन को सुनने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा स्थल पर भक्ति गीतों और भजनों के माध्यम से वातावरण और भी आध्यात्मिक बन जा रहा है।यज्ञ के आचार्य मिथिलेश वैद्य ने बताया कि मां सत्यचंडी महायज्ञ अत्यंत फलदायी होता है। इसके आयोजन और परिक्रमा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और रोग, कष्ट और दुखों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर इस प्रकार का यज्ञ होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और गांव में सुख-समृद्धि तथा उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। भक्तिमय बना माहौल इस महायज्ञ के मुख्य यजमान चंदन मिश्रा हैं, जिन्होंने अपने परिवार के साथ विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की और फलाहार व्रत रखकर अनुष्ठान में भाग लिया। आयोजन के मुख्य कार्यकर्ता शशिकांत मालाकार ने बताया कि यह पांच दिवसीय यज्ञ शत्रु विजय, रोग मुक्ति और धन-समृद्धि की कामना को लेकर आयोजित किया गया है।इस आयोजन को सफल बनाने में गांव के कई गणमान्य लोग और ग्रामीण सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। औरंगाबाद प्रखंड अंतर्गत अदरी नदी के तट पर स्थित बड़वां गांव इन दिनों पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है। यहां जनकल्याण और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर मां सत्यचंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। आज यज्ञ का तीसरा दिन अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखी गई।इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत 10 अप्रैल को भव्य जल शोभा यात्रा के साथ हुई थी। गांव की महिलाओं और युवतियों ने कलश लेकर पूरे क्षेत्र में भ्रमण किया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत यज्ञ का शुभारंभ किया गया। तब से लेकर प्रतिदिन पूजा-पाठ, हवन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं, जिनमें श्रद्धालु बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने बताया कि 11 अप्रैल यानी शनिवार को पंचांग पूजन, मंडप प्रवेश, वैदिक पूजन व अग्नि मंथन के साथ पाठ प्रारंभ किया गया। रविवार को यज्ञ में आवाहित देवी देवताओं का पूजन व हवन के बाद पाठ प्रारंभ होगा। इसी प्रकार सोमवार व मंगलवार को भी पूजा हवन और पाठ होगा। बुधवार को विशाल भंडारा के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति और संतों की विदाई की जाएगी। प्रवचन सुनने के लिए पहुंच रहे आसपास के कई गांव के श्रद्धालु आयोजन समिति के अनुसार, प्रतिदिन संध्या 7 बजे से प्रयागराज से पधारे कथावाचक अनुराग शास्त्री की ओर से कथा वाचन किया जा रहा है, जबकि रात के 9 बजे से सावित्री शास्त्री की ओर से प्रवचन दिया जा रहा है। कथा और प्रवचन को सुनने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा स्थल पर भक्ति गीतों और भजनों के माध्यम से वातावरण और भी आध्यात्मिक बन जा रहा है।यज्ञ के आचार्य मिथिलेश वैद्य ने बताया कि मां सत्यचंडी महायज्ञ अत्यंत फलदायी होता है। इसके आयोजन और परिक्रमा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और रोग, कष्ट और दुखों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर इस प्रकार का यज्ञ होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और गांव में सुख-समृद्धि तथा उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। भक्तिमय बना माहौल इस महायज्ञ के मुख्य यजमान चंदन मिश्रा हैं, जिन्होंने अपने परिवार के साथ विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की और फलाहार व्रत रखकर अनुष्ठान में भाग लिया। आयोजन के मुख्य कार्यकर्ता शशिकांत मालाकार ने बताया कि यह पांच दिवसीय यज्ञ शत्रु विजय, रोग मुक्ति और धन-समृद्धि की कामना को लेकर आयोजित किया गया है।इस आयोजन को सफल बनाने में गांव के कई गणमान्य लोग और ग्रामीण सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।


