Israeli Ambassador Statement on Pakistan: अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अहम शांति वार्ता से पहले एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भारत में इजराइल के राजदूत ने पाकिस्तान को लेकर कड़ा बयान दिया है, जिससे कूटनीतिक माहौल और गरमा गया है। इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत से ठीक पहले आए इस बयान ने पहले से ही नाजुक हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
पाकिस्तान को लेकर इजराइल ने क्या कहा?
भारत में इजराइल के राजदूत रेवेन अजार ने पाकिस्तान पर भरोसा न करने की बात कही है। उनका कहना है कि पाकिस्तान ऐसा देश है जो आतंकवाद को बढ़ावा देता है, इसलिए उस पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इजराइल इस मामले में अपने अमेरिकी सहयोगियों पर भरोसा कर रहा है और उम्मीद करता है कि वे इस स्थिति को संभालेंगे।
इस बयान को ऐसे समय में दिया गया है जब पाकिस्तान खुद अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
इस्लामाबाद में अहम शांति वार्ता
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच अहम आमने-सामने की बातचीत होने जा रही है। इसका उद्देश्य हाल ही में हुए दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम को मजबूत करना और आगे के टकराव को रोकना है। दोनों देशों ने बुधवार को इस शर्त के साथ युद्धविराम पर सहमति जताई थी कि आगे बातचीत के जरिए स्थायी समाधान तलाशा जाएगा।
ईरान ने रखीं 10 अहम शर्तें
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह बातचीत अपनी प्रस्तावित 10-सूत्रीय योजना के आधार पर आगे बढ़ाना चाहता है। इस योजना में मुख्य रूप से प्रतिबंधों में राहत, भविष्य में हमलों से सुरक्षा की गारंटी और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों के समाधान जैसे अहम बिंदु शामिल हैं। ईरान शांति के लिए तैयार जरूर दिख रहा है, लेकिन साफ है कि वह बातचीत अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ाना चाहता है।
भरोसे की कमी बनी बड़ी चुनौती
हालांकि बातचीत की पहल हो चुकी है लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास अब भी बना हुआ है। हाल ही में लेबनान में हुए संघर्ष और युद्धविराम के उल्लंघन के आरोपों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इसके अलावा, 28 अप्रैल को हुए हमलों ने भी दोनों देशों के बीच भरोसे को कमजोर किया है क्योंकि उस समय बातचीत जारी थी।
क्या असर पड़ेगा इस बयान का?
इजराइल के इस बयान से शांति प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ सकता है। पाकिस्तान पहले ही एक संवेदनशील भूमिका में है और ऐसे में उस पर उठे सवाल वार्ता के माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बयान कूटनीतिक दबाव बढ़ाते हैं और बातचीत को और मुश्किल बना सकते हैं।


