Kachra Aka Aditya Lakhia Exclusive Interview: साल 2001 में आई थी बॉलीवुड की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में से एक ‘लगान’। इस फिल्म को आमिर खान ने प्रोड्यूस किया था और इसमें मुख्य भूमिका भी निभाई थी। 25 साल पहले रिलीज हुई इस फिल्म ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की, बल्कि इसकी जबरदस्त कहानी और कलाकरों के बेहतरीन अभिनय ने ‘लगान’ को ऑस्कर तक पहुंचाया था। आशुतोष गोवारिकर द्वारा निर्मित फिल्म में ब्रिटिश शासन के दौरान गुलामी की जंजीरों में जकड़े गांव के लोगों के संघर्ष और क्रिकेट के जरिए लगान माफ कराने की जंग को बेहद दमदार तरीके से दिखाया गया है। फिल्म के हर किरदार, खासकर ‘कचरा’ जैसे किरदार ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। पत्रिका टीम ने फिल्म में ‘कचरा’ का किरदार निभाने वाले एक्टर आदित्य लखिया से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने अपनी भूमिका और फिल्म से जुड़ी दिलचस्प बातें शेयर कीं।
सवाल: ‘लगान’ फिल्म में आपके किरदार ‘कचरा’ ने आपकी जिंदगी कैसे बदली?
जवाब: “मेरी प्रोफेशनल लाइफ पर ‘कचरा’ का तो बहुत बड़ा इंपैक्ट पड़ा क्योंकि ‘लगान’ से पहले मैंने चार पिक्चरें की थी, जिनमें ‘ओम दरबदर’, ‘रिहाई’ ‘जो जीता वही सिकंदर’ और कभी हां कभी ना’, लेकिन ‘लगान’ ने जो मुझे फेम और पहचान दी वो मुझे किसी और फिल्म ने नहीं दिलाई। 2001 में जब लगान रिलीज हुई उस टाइम तो बंपर बंपर सुपर बंपर हिट थी, आज भी लोग मुझे मेरे कैरेक्टर ‘कचरा’ के नाम से जानते हैं। आज भी कहीं पे भी मैं जाता हूं, कहीं दुकान में जाता हूं या रेस्टोरेंट में जाता हूं या सड़क पे चलता हूं। लोग मुझे ‘लगान’ से रिलेट करते हैं।”
सवाल: जब आपको ‘कचरा’ नाम का किरदार ऑफर हुआ तो आपके दिमाग में सबसे पहले क्या आया?
जवाब: “कचरा का वो कैरेक्टर ही ऐसा था जो कि गांव का एक गरीब आदमी था, जो कचरा बीनता था, और नीची जाति से आता था। लेकिन फिल्म में जो उसकी हीरोइज़्म थी वो काफी अट्रैक्टिव थी। उसकी हीरोइज़्म थी वो हैट्रिक लेता है और गांव को मैच जीताता है और लास्ट में भुवन के साथ मतलब आमिर खान जी के साथ लास्ट विकेट स्टैंड भी देता है। वो फिल्म का ‘मैन ऑफ द मैच’ है।”

सवाल: ‘लगान’ और ‘गदर’ के क्लैश को लेकर आपका क्या कहना है?
जवाब: वो तो बहुत बार होता है, कई बड़ी फिल्मों के साथ ऐसा क्लैश देखने को मिलता है। लेकिन उस समय ‘लगान’ और ‘गदार:एक प्रेम कथा’ दोनों ही फिल्में दर्शकों को बहुत पसंद आईं। दोनों का कंटेंट अलग था, इसलिए दोनों ने अपनी-अपनी ऑडियंस बनाई और सुपरहिट रहीं। ऐसे क्लैश से कभी-कभी इंडस्ट्री को भी फायदा होता है।
सवाल: ‘लगान’ में दिखाए गए छुआछूत के मुद्दे पर आज के समय में कितना बदलाव आया है?
जवाब: “फिल्म में जिस तरह छुआछूत और भेदभाव को दिखाया गया था, आज के समय में उसमें काफी बदलाव देखने को मिला है। समाज पहले के मुकाबले ज्यादा जागरूक और समझदार हुआ है। हालांकि यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और कहीं-कहीं अब भी देखने को मिलता है, लेकिन इसकी तीव्रता पहले की तुलना में काफी कम हो गई है।”
सवाल: आमिर खान और सलमान खान के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?
जवाब: “सच बताऊं तो सलमान खान की ‘मातृभूमि’ में मेरा सलमान भाई के साथ कोई सीन नहीं है क्योंकि फिल्म में मैं एक आर्मी डॉक्टर का किरदार निभा रहा हूं। और मेरा जो सेट था वो आर्मी हॉस्पिटल में था। और वहां सलमान भाई का कोई सीन नहीं है। इसलिए मैंने उनके साथ स्क्रीन शेयर नहीं की है। लेकिन मैं ये जरूर कहना चाहूंगा कि सलमान खान बहुत ही उम्दा इंसान हैं।
आमिर खान के साथ मैंने काफी काम किया है। हमने साथ में ‘जो जीता वही सिकन्दर’ और ‘लगान’ में स्क्रीन शेयर की, वहीं आमिर भाई की ‘अकेले हम अकेले तुम’ में मैंने बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया था। उनके बारे में ये कहूंगा कि वो अपने किरदार, अपनी फिल्म पर बहुत मेहनत करते हैं, और जब तक उनको ठीक नहीं लगता तब तक सीन को ओके नहीं होने देते हैं। उनको सब परफेक्ट चाहिए इसलिए उनको मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहा जाता है।”

सवाल: ‘धुरंधर’ से आपका फेवरेट किरदार कौन सा है और अगर मौका मिलता तो आप किस किरदार को निभाते?
जवाब: “राकेश बेदी जी का किरदार बहुत अच्छा था और उन्होंने इतना बढ़िया किया है। वैसे ‘धुरंधर’ में सभी लोगों ने अच्छा काम किया। फिल्म का सबसे छोटा कैरेक्टर भी असर डालता है। फिल्म के कलाकारों का चयन बहुत अच्छा है और बहुत ही फैंटास्टिक फिल्म है। और जहां तक बात है पसंदीदा रोल चुनने की तो मैं ‘जमील जमाली’ के किरदार को चुनता।”
सवाल: आपके अपकमिंग प्रोजेक्ट्स कौन-कौन से हैं?
जवाब: जवाब: “मेरे अपकमिंग प्रोजेक्ट्स दो गुजराती फिल्में हैं। एक को तो मैंने प्रोड्यूस किया। फिल्म को लेकर Jio से बात चल रही है. इसके अलावा मेरी एक गुजराती फिल्म रिलीज होने वाली है। बाकी तो ‘मातृभूमि’ और कई प्रोजेक्ट्स पर काम तो चल ही रहा है।”
सवाल: ‘मातृभूमि’ से जुड़ा कोई खास किस्सा?

जवाब: “फिल्म की ज्यादातर शूटिंग लद्दाख में हुई है और मैं वहां तीन-चार दिन के लिए ही था लेकिन बहुत ठंडी थी। फिल्म काफी डिफिकल्ट कंडीशंस में शूट हुई थी, वहां शूट करना आसान नहीं था क्योंकि लोकेशनेशंस ही ऐसे थे। फिल्म से जुड़े हर व्यक्ति ने बहुत मेहनत से काम किया है। आखिर में मैं लोगों से यही कहना चाहूंगा कि जब ‘मातृभूमि’ आए तब प्लीज इस फिल्म को सपोर्ट करना और जरूर देखना।”


