Encephalitis Symptoms: राजस्थान के सलूम्बर जिले में बच्चों की रहस्यमयी मौतों ने लोगों को डरा दिया है। घाटा और लालपुरा गांव में 2 से 4 साल के पांच छोटे बच्चों की मौत हो गई, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। डॉक्टरों को शक है कि यह मामला एन्सेफलाइटिस (दिमाग में सूजन) से जुड़ा हो सकता है, हालांकि अभी इसकी पूरी पुष्टि नहीं हुई है।
क्या हो रहा है असल में?
बताया जा रहा है कि जिन बच्चों की मौत हुई, उनमें कुछ एक जैसे लक्षण दिखे। जैसे – उल्टी होना, बेहोशी आना और दिमाग का ठीक से काम न करना (अल्टर्ड सेंसरियम)। ये सभी लक्षण वायरल एन्सेफलाइटिस से मिलते-जुलते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर इस बीमारी की आशंका जता रहे हैं। जिला प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए मेडिकल टीमों को गांवों में भेजा है। उदयपुर मेडिकल कॉलेज की टीम जांच कर रही है और सैंपल लैब में भेजे गए हैं, ताकि सही कारण का पता चल सके।
चांदीपुरा वायरस का शक क्यों?
इस मामले में चांदीपुरा वायरस का नाम भी सामने आ रहा है। यह एक खतरनाक वायरस है जो आमतौर पर सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खियों) के जरिए फैलता है। पहले भी भारत के कुछ ग्रामीण इलाकों में यह बच्चों को प्रभावित कर चुका है। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन खतरे को देखते हुए सावधानी बढ़ा दी गई है।
सरकार और हेल्थ डिपार्टमेंट क्या कर रहे हैं?
स्वास्थ्य विभाग ने गांव-गांव जाकर सर्वे शुरू कर दिया है। बच्चों की जांच की जा रही है और लोगों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही, मच्छर और कीड़ों को खत्म करने के उपाय (वेक्टर कंट्रोल) भी किए जा रहे हैं।
एन्सेफलाइटिस इतना खतरनाक क्यों है?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक (NINDS) में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार एन्सेफलाइटिस में दिमाग में सूजन आ जाती है, जो बहुत तेजी से बढ़ सकती है। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह ज्यादा खतरनाक होता है। इसके शुरुआती लक्षण तेज बुखार, सिर दर्द, उल्टी, कंफ्यूजन या बेहोशी है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह दौरे (seizures), कोमा या मौत तक का कारण बन सकता है।
यह बीमारी कैसे होती है?
एन्सेफलाइटिस ज्यादातर वायरस से होता है। जैसे – हर्पीस वायरस, मच्छरों से फैलने वाले वायरस (जैसे वेस्ट नाइल), या बचपन की बीमारियां जैसे खसरा और मम्प्स। कभी-कभी बैक्टीरिया या फंगस भी इसकी वजह बन सकते हैं।
इससे बचाव कैसे करें?
पूरी तरह बचाव मुश्किल है, लेकिन कुछ आसान उपाय अपनाकर खतरा कम किया जा सकता है:
- बच्चों के टीके समय पर लगवाएं
- मच्छरों और कीड़ों से बचाव करें
- पूरे कपड़े पहनें (फुल स्लीव्स)
- DEET वाले मच्छर भगाने वाले क्रीम का इस्तेमाल करें
- घर के आसपास पानी जमा न होने दें
- खिड़कियों पर जाली लगाएं


