पटना नगर निगम ने शहर को गर्मी, मानसून और स्वच्छता के मोर्चे पर एक साथ तैयार करने के लिए अभियान छेड़ दिया है। 15 अप्रैल के बाद स्वच्छ सर्वेक्षण की केंद्रीय टीम का दौरा संभावित है। शहर का मूल्यांकन 10 प्रमुख मानकों पर किया जाएगा, जिनमें दर्शनीय स्वच्छता, कूड़ा वर्गीकरण और संग्रहण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता तक पहुंच, प्रयुक्त जल प्रबंधन, गाद-कीचड़ की मशीनी सफाई, स्वच्छता के विशेष प्रयास, जरूरी सेवाओं की स्थिति, सफाई कर्मचारियों का कल्याण और नागरिक प्रतिक्रिया और शिकायत निवारण शामिल हैं। इन सभी मानकों पर कुल 12,000 अंकों का मूल्यांकन होगा, जिसमें कई प्रमुख मानकों पर 1500-1500 अंक निर्धारित हैं। इसको देखते हुए नगर निगम ने अपनी पूरी मशीनरी को एक्टिव मोड में डाल दिया है। इस बार लक्ष्य केवल नियमित कामकाज नहीं, बल्कि जमीनी सुधार के साथ रैंकिंग में ठोस उछाल हासिल करना है। 53.68 करोड़ से जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत गर्मी में जल संकट से निपटने के लिए नगर निगम ने 53.68 करोड़ रुपए जलापूर्ति प्रमंडल को आवंटित की है। इस राशि के तहत शहर में कुल 121 जलापूर्ति योजनाओं को गति दी जा रही है, जिनमें 98 योजनाएं नई पाइपलाइन बिछाने से संबंधित हैं, जबकि 23 योजनाएं हाई-एंड बोरिंग इंस्टॉलेशन से जुड़ी हुई हैं। पाटलिपुत्र अंचल में 16, बांकीपुर में 29, कंकड़बाग में 12, नूतन राजधानी में 18, अजीमाबाद में 16 और पटना सिटी में 7 पाइपलाइन परियोजनाएं लागू होंगी। वहीं हाई-एंड बोरिंग के तहत पाटलिपुत्र में 5, बांकीपुर में 3, कंकड़बाग में 1, नूतन राजधानी में 5, अजीमाबाद में 6 और पटना सिटी में 3 योजनाएं शामिल हैं। इन कार्यों के जरिए न केवल नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी, बल्कि पुराने मोटर, पंप, ट्रांसफॉर्मर और पाइपलाइन की मरम्मत भी की जाएगी, ताकि जिन इलाकों में पानी की कमी या कम दबाव की समस्या है, वहां राहत मिल सके। उपयोगिता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा नगर निगम ने 6 अंचलों को कुल 2,61,68,068 रुपए आवंटित कर मानसून और हीट वेव से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। इसमें 2,25,68,068 रुपए सफाई कार्य में लगे वाहनों की मरम्मत, सर्विसिंग, टायर-ट्यूब, लुब्रिकेंट और बैटरी जैसी आवश्यकताओं पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक अंचल को 5 लाख रुपए की दर से कुल 30 लाख रुपए कंटिन्जेंसी मद में दिए गए हैं, जिससे स्वच्छ सर्वेक्षण, सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्य किए जा सकें। नाला उड़ाही के लिए प्रत्येक अंचल को 1-1 लाख की अतिरिक्त राशि भी दी गई है। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि सभी कार्यों के लिए साक्ष्य सहित उपयोगिता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा और हर भुगतान से पहले प्री-ऑडिट जांच की जाएगी। नाला उड़ाही और मशीनीकरण पर जोर मानसून से पहले शहर को जलजमाव से बचाने के लिए नाला उड़ाही, सिल्ट उठाव, एंटी-लार्वा छिड़काव और मैनहोल की मरम्मत को प्राथमिकता दी गई है। नगर निगम ने निर्देश दिया है कि इन कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही सफाई कार्य में लगे वाहनों की मुख्यालय स्तर से सघन जांच की जा रही है। जेसीबी, पोकलेन, हाईवा, टाटा 407, क्लोज और ओपन टीपर, सुपर सकर, डंप टैंक, एंटी स्मोक वाहन और वाटर टैंकर जैसे संसाधनों की उपलब्धता की नियमित मॉनिटरिंग हो रही है। सभी अंचलों को प्रतिदिन जीपीएस युक्त फोटो के साथ रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि काम की पारदर्शिता बनी रहे। 7,333 आवारा कुत्तों का नसबंदी शहर में आवारा कुत्तों और रेबीज के खतरे को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने व्यापक अभियान चलाया है। पिछले छह महीनों में 7,333 कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण किया गया है। राष्ट्रीय मानकों के अनुसार 70 प्रतिशत कुत्तों का टीकाकरण जरूरी होता है और पटना नगर निगम इसी लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। अब तक 366 शिकायतों का निष्पादन भी किया जा चुका है, जिससे लोगों को राहत मिली है।
डॉग फीडिंग जोन और मेगा शेल्टर की योजना आवारा कुत्तों के बेहतर प्रबंधन के लिए नगर निगम हर वार्ड में लगभग 10×10 फीट क्षेत्र में डॉग फीडिंग जोन विकसित करने जा रहा है। इससे कुत्तों को नियंत्रित स्थान पर भोजन मिलेगा और शहर में गंदगी कम होगी। इसके साथ ही रामचक बैरिया में लगभग 1.29 एकड़ भूमि पर 2000 कुत्तों की क्षमता वाले बड़े डॉग शेल्टर के निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। यहां कुत्तों का उपचार, टीकाकरण और पुनर्वास किया जाएगा, जिससे शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। चक बैरिया में लीगेसी वेस्ट निस्तारण पर फोकस शहर की स्वच्छता रैंकिंग को बेहतर बनाने के लिए चक बैरिया में वर्षों से जमा लीगेसी वेस्ट के निस्तारण का कार्य तेज कर दिया गया है। कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा रहा है और प्लास्टिक वेस्ट के उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल शहर की दृश्य स्वच्छता में सुधार होगा, बल्कि स्वच्छ सर्वेक्षण में अतिरिक्त अंक मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। पटना नगर निगम ने शहर को गर्मी, मानसून और स्वच्छता के मोर्चे पर एक साथ तैयार करने के लिए अभियान छेड़ दिया है। 15 अप्रैल के बाद स्वच्छ सर्वेक्षण की केंद्रीय टीम का दौरा संभावित है। शहर का मूल्यांकन 10 प्रमुख मानकों पर किया जाएगा, जिनमें दर्शनीय स्वच्छता, कूड़ा वर्गीकरण और संग्रहण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता तक पहुंच, प्रयुक्त जल प्रबंधन, गाद-कीचड़ की मशीनी सफाई, स्वच्छता के विशेष प्रयास, जरूरी सेवाओं की स्थिति, सफाई कर्मचारियों का कल्याण और नागरिक प्रतिक्रिया और शिकायत निवारण शामिल हैं। इन सभी मानकों पर कुल 12,000 अंकों का मूल्यांकन होगा, जिसमें कई प्रमुख मानकों पर 1500-1500 अंक निर्धारित हैं। इसको देखते हुए नगर निगम ने अपनी पूरी मशीनरी को एक्टिव मोड में डाल दिया है। इस बार लक्ष्य केवल नियमित कामकाज नहीं, बल्कि जमीनी सुधार के साथ रैंकिंग में ठोस उछाल हासिल करना है। 53.68 करोड़ से जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत गर्मी में जल संकट से निपटने के लिए नगर निगम ने 53.68 करोड़ रुपए जलापूर्ति प्रमंडल को आवंटित की है। इस राशि के तहत शहर में कुल 121 जलापूर्ति योजनाओं को गति दी जा रही है, जिनमें 98 योजनाएं नई पाइपलाइन बिछाने से संबंधित हैं, जबकि 23 योजनाएं हाई-एंड बोरिंग इंस्टॉलेशन से जुड़ी हुई हैं। पाटलिपुत्र अंचल में 16, बांकीपुर में 29, कंकड़बाग में 12, नूतन राजधानी में 18, अजीमाबाद में 16 और पटना सिटी में 7 पाइपलाइन परियोजनाएं लागू होंगी। वहीं हाई-एंड बोरिंग के तहत पाटलिपुत्र में 5, बांकीपुर में 3, कंकड़बाग में 1, नूतन राजधानी में 5, अजीमाबाद में 6 और पटना सिटी में 3 योजनाएं शामिल हैं। इन कार्यों के जरिए न केवल नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी, बल्कि पुराने मोटर, पंप, ट्रांसफॉर्मर और पाइपलाइन की मरम्मत भी की जाएगी, ताकि जिन इलाकों में पानी की कमी या कम दबाव की समस्या है, वहां राहत मिल सके। उपयोगिता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा नगर निगम ने 6 अंचलों को कुल 2,61,68,068 रुपए आवंटित कर मानसून और हीट वेव से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। इसमें 2,25,68,068 रुपए सफाई कार्य में लगे वाहनों की मरम्मत, सर्विसिंग, टायर-ट्यूब, लुब्रिकेंट और बैटरी जैसी आवश्यकताओं पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक अंचल को 5 लाख रुपए की दर से कुल 30 लाख रुपए कंटिन्जेंसी मद में दिए गए हैं, जिससे स्वच्छ सर्वेक्षण, सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्य किए जा सकें। नाला उड़ाही के लिए प्रत्येक अंचल को 1-1 लाख की अतिरिक्त राशि भी दी गई है। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि सभी कार्यों के लिए साक्ष्य सहित उपयोगिता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा और हर भुगतान से पहले प्री-ऑडिट जांच की जाएगी। नाला उड़ाही और मशीनीकरण पर जोर मानसून से पहले शहर को जलजमाव से बचाने के लिए नाला उड़ाही, सिल्ट उठाव, एंटी-लार्वा छिड़काव और मैनहोल की मरम्मत को प्राथमिकता दी गई है। नगर निगम ने निर्देश दिया है कि इन कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही सफाई कार्य में लगे वाहनों की मुख्यालय स्तर से सघन जांच की जा रही है। जेसीबी, पोकलेन, हाईवा, टाटा 407, क्लोज और ओपन टीपर, सुपर सकर, डंप टैंक, एंटी स्मोक वाहन और वाटर टैंकर जैसे संसाधनों की उपलब्धता की नियमित मॉनिटरिंग हो रही है। सभी अंचलों को प्रतिदिन जीपीएस युक्त फोटो के साथ रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि काम की पारदर्शिता बनी रहे। 7,333 आवारा कुत्तों का नसबंदी शहर में आवारा कुत्तों और रेबीज के खतरे को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने व्यापक अभियान चलाया है। पिछले छह महीनों में 7,333 कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण किया गया है। राष्ट्रीय मानकों के अनुसार 70 प्रतिशत कुत्तों का टीकाकरण जरूरी होता है और पटना नगर निगम इसी लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। अब तक 366 शिकायतों का निष्पादन भी किया जा चुका है, जिससे लोगों को राहत मिली है।
डॉग फीडिंग जोन और मेगा शेल्टर की योजना आवारा कुत्तों के बेहतर प्रबंधन के लिए नगर निगम हर वार्ड में लगभग 10×10 फीट क्षेत्र में डॉग फीडिंग जोन विकसित करने जा रहा है। इससे कुत्तों को नियंत्रित स्थान पर भोजन मिलेगा और शहर में गंदगी कम होगी। इसके साथ ही रामचक बैरिया में लगभग 1.29 एकड़ भूमि पर 2000 कुत्तों की क्षमता वाले बड़े डॉग शेल्टर के निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। यहां कुत्तों का उपचार, टीकाकरण और पुनर्वास किया जाएगा, जिससे शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। चक बैरिया में लीगेसी वेस्ट निस्तारण पर फोकस शहर की स्वच्छता रैंकिंग को बेहतर बनाने के लिए चक बैरिया में वर्षों से जमा लीगेसी वेस्ट के निस्तारण का कार्य तेज कर दिया गया है। कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा रहा है और प्लास्टिक वेस्ट के उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल शहर की दृश्य स्वच्छता में सुधार होगा, बल्कि स्वच्छ सर्वेक्षण में अतिरिक्त अंक मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।


