श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का छठा दिन बुधवार को कथा में रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया गया, राजाबाजार स्थित गीता भवन में चल रहे हरिश्चंद्र वंशीय समाज महिला समिति की ओर से आयोजित किया जा रहा हैं,कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।जिसे सुनकर श्रद्धालु कृष्ण भक्ति में लीन हो गए। कथा के आगे बढ़ने के साथ ही पंडाल में मौजूद श्रोता कृष्ण भक्ति में डूबते चले गए। ‘जय कृष्ण’ के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा, और श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था स्पष्ट दिखाई दी। विवाह के आध्यात्मिक महत्व को समझाया कथा व्यास आचार्य उमेश कुमार मिश्रा ने रुक्मिणी विवाह के आध्यात्मिक महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि भगवान की शरण में जाने से ही जीवन का सच्चा कल्याण संभव है। जब तक मनुष्य मोह-माया में उलझा रहता है, उसे वास्तविक शांति नहीं मिलती। आचार्य मिश्रा ने स्पष्ट किया कि रुक्मिणी और कृष्ण का विवाह आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। यह प्रसंग जीवन के परम उद्देश्य को दर्शाता है, जिसमें व्यक्ति को निष्काम भाव से भक्ति करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी यदि व्यक्ति अपने सभी कर्म भगवान को समर्पित कर दे, तो उसका जीवन सफल और सार्थक बन सकता है। कथा के माध्यम से भक्ति, समर्पण और त्याग का संदेश श्रद्धालुओं तक पहुँचाया गया। परीक्षित मोक्ष का प्रसंग सुनाया जाएगा इस अवसर पर हरिश्चंद्र वंशीय समाज महिला समिति की अध्यक्ष रागिनी रस्तोगी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सीमा रस्तोगी, मंत्री शालिनी रस्तोगी, कोषाध्यक्ष ऋचा रस्तोगी और संगठन मंत्री क्षमा रस्तोगी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।समिति की अध्यक्ष रागिनी रस्तोगी ने बताया कि गुरुवार को सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष का प्रसंग सुनाया जाएगा। इसके साथ ही कथा का विश्राम और पूर्णाहूति भी संपन्न होगी। अंतिम दिन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।


