सडक़ है या सिर्फ कागजों में? कोर्ट ने 80 फीट रास्ते की हकीकत जांचने कमिश्नर किया नियुक्त

सडक़ है या सिर्फ कागजों में? कोर्ट ने 80 फीट रास्ते की हकीकत जांचने कमिश्नर किया नियुक्त

ग्वालियर. नारायण विहार कॉलोनी के इंडस्ट्री एरिया में सडक़ पर अतिक्रमण को लेकर चल रहे विवाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कागजी रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए मौके की वास्तविक स्थिति जानने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता को कमिश्नर नियुक्त किया है। अब यह जांच तय करेगी कि 80 फीट चौड़ा रास्ता वास्तव में मौजूद है या सिर्फ दस्तावेजों में ही सीमित है।
क्या है मामला?
नारायण विहार कॉलोनी के इंडस्ट्री एरिया में सडक़ पर अतिक्रमण होने से फैक्ट्री तक पहुंच प्रभावित होने की शिकायत याचिका में की गई। प्रशासन की ओर से कोर्ट में पेश स्टेटस रिपोर्ट में दावा किया गया कि संबंधित सडक़ से अतिक्रमण हटा दिया गया है और अब वहां सामान्य आवाजाही हो रही है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि पहले अतिक्रमण था तो उसे 26 अक्टूबर 2025 को हटा दिया गया था। निरीक्षण के दौरान फोटो और पंचनामा भी प्रस्तुत किए गए।
प्रशासन का दावा… सरकारी रिपोर्ट के अनुसार सडक़ पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त, टीम के निरीक्षण में कोई बाधा नहीं मिली। हालांकि, याचिकाकर्ता ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जमीनी हकीकत इससे अलग है और सडक़ पर अब भी अतिक्रमण बना हुआ है। उनका कहना है कि वाहनों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
याचिकाकर्ता की आपत्ति… जमीनी स्थिति अलग बताई, 80 फीट चौड़ी सडक़ उपलब्ध न होने का आरोप। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में यह भी कहा कि लीज डीड के अनुसार फैक्ट्री तक 80 फीट चौड़ी सडक़ होना अनिवार्य है, लेकिन स्टेटस रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण ङ्क्षबदु का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
हाईकोर्ट का आदेश
वरिष्ठ अधिवक्ता केएन गुप्ता को कमिश्नर नियुक्त, सभी पक्षों की मौजूदगी में मौके का निरीक्षण होगा। कोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि तहसीलदार स्तर के अधिकारी को जांच में सहयोग के लिए नियुक्त किया जाए और निरीक्षण के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
रिपोर्ट में कमी
स्टेटस रिपोर्ट में 80 फीट चौड़ाई का स्पष्ट जिक्र नहीं, जिससे कोर्ट ने रिपोर्ट पर सवाल उठाए। राज्य पक्ष भी इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे सका, जिससे मामले में तथ्यात्मक विवाद और गहरा गया। इसी को देखते हुए हाईकोर्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए हस्तक्षेप किया।
आगे क्या होगा?… कमिश्नर को 30 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। उनकी फीस 20 हजार रुपए याचिकाकर्ता द्वारा वहन की जाएगी। इसके अलावा, निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी कलेक्टर को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

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