कैमूर जिले के चांद प्रखंड स्थित ग्राम कुड़ी में मंगलवार की दोपहर करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच भीषण आग लग गई। इस घटना में लगभग 16 एकड़ (60 से 65 बीघा) गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। आग से गुड्डू खरवार, नंदलाल राम, मनोज राम, सुनील उर्फ चंदन तिवारी, कपूरचंद साह, राजवंश साह, राजकुमार, मोहन राम और ललिता देवी सहित नौ किसानों की फसलें प्रभावित हुईं। किसानों में सुनील उर्फ चंदन तिवारी को सर्वाधिक नुकसान हुआ, जिनकी 25 से 30 बीघा गेहूं की फसल जल गई। इसके बाद कपूरचंद साह और ललिता देवी की लगभग 20 से 22 बीघा फसल भी आग की भेंट चढ़ गई। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन अग्निशमन दल समय पर नहीं पहुंच सका। आग लगने का सटीक कारण अभी तक अज्ञात है। बताया जा रहा है कि अचानक आग भड़की और देखते ही देखते फैल गई। घटनास्थल पर चांद प्रखंड विकास पदाधिकारी मोहम्मद हदीद खान और कुड़ी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि बबलू सिंह पहुंचे। उन्होंने प्रभावित किसानों से बातचीत की और उन्हें उचित सलाह दी। स्थानीय लोगों के अनुसार, चांद प्रखंड में अग्निशमन सेवा की अनुपलब्धता के कारण फसल को अधिक नुकसान हुआ। यदि अग्निशमन दल समय पर पहुंच जाता, तो बड़े पैमाने पर क्षति को रोका जा सकता था। कैमूर जिले के चांद प्रखंड स्थित ग्राम कुड़ी में मंगलवार की दोपहर करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच भीषण आग लग गई। इस घटना में लगभग 16 एकड़ (60 से 65 बीघा) गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। आग से गुड्डू खरवार, नंदलाल राम, मनोज राम, सुनील उर्फ चंदन तिवारी, कपूरचंद साह, राजवंश साह, राजकुमार, मोहन राम और ललिता देवी सहित नौ किसानों की फसलें प्रभावित हुईं। किसानों में सुनील उर्फ चंदन तिवारी को सर्वाधिक नुकसान हुआ, जिनकी 25 से 30 बीघा गेहूं की फसल जल गई। इसके बाद कपूरचंद साह और ललिता देवी की लगभग 20 से 22 बीघा फसल भी आग की भेंट चढ़ गई। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन अग्निशमन दल समय पर नहीं पहुंच सका। आग लगने का सटीक कारण अभी तक अज्ञात है। बताया जा रहा है कि अचानक आग भड़की और देखते ही देखते फैल गई। घटनास्थल पर चांद प्रखंड विकास पदाधिकारी मोहम्मद हदीद खान और कुड़ी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि बबलू सिंह पहुंचे। उन्होंने प्रभावित किसानों से बातचीत की और उन्हें उचित सलाह दी। स्थानीय लोगों के अनुसार, चांद प्रखंड में अग्निशमन सेवा की अनुपलब्धता के कारण फसल को अधिक नुकसान हुआ। यदि अग्निशमन दल समय पर पहुंच जाता, तो बड़े पैमाने पर क्षति को रोका जा सकता था।


